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भारत के हितों के लिए बल्लेबाजी करता रहूंगा : तेंदुलकर

भारत के हितों के लिए बल्लेबाजी करता रहूंगा : तेंदुलकर

भारत रत्न से नवाजे गए पहले खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर ने मंगलवार को कहा कि भले ही उनका क्रिकेट करियर खत्म हो गया है लेकिन वह भारत के हित के लिए बल्लेबाजी करते रहेंगे।
     
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ग्रहण करने के बाद तेंदुलकर ने पत्रकारों से कहा कि मेरा क्रिकेट करियर भले ही खत्म हो गया है लेकिन मैं भारत के हित के लिए बल्लेबाजी करता रहूंगा ताकि देशवासियों को मुस्कुराने के मौके दे सकूं।
    
क्रिकेट के इतिहास में सर्वाधिक रन और शतक बनाने वाले इस बल्लेबाज ने भारत रत्न अपनी मां समेत देश की सभी मांओं को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि यह सबसे बड़ा सम्मान है और मैं इसे पाकर बहुत खुश हूं। मैं वही बात दोहराना चाहता हूं जो मैंने दो महीने पहले कही थी कि मैं यह सम्मान अपनी मां और भारत की सभी मांओं को समर्पित करता हूं जिन्होंने अपने बच्चों के सपने पूरे करने के लिए अपनी खुशियों और इच्छाओं की कुर्बानियां दी हैं।
    
अपनी पत्नी अंजलि और बेटी सारा के साथ पुरस्कार लेने आए तेंदुलकर ने कहा कि वह खुद को खुशकिस्मत मानते हैं कि उनका भारत में जन्म हुआ। उन्होंने कहा कि मैं भाग्यशाली हूं कि इस खूबसूरत देश में पैदा हुआ। इतने साल तक देशवासियों ने जो प्यार मुझ पर बरसाया है, उसके लिए मैं शुक्रगुजार हूं।
    
मात्र सोलह बरस और 205 दिन की उम्र में पाकिस्तान के खिलाफ 1989 में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण करने वाले तेंदुलकर ने 200 टेस्ट में 53.78 की औसत से 15921 रन बनाए हैं। वनडे क्रिकेट में उन्होंने 53.78 की स्ट्राइक रेट से 463 मैचों में 18426 रन बनाए हैं।
       
पिछले साल नवंबर में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने शहर मुंबई में आखिरी टेस्ट खेलने वाले तेंदुलकर को 1994 में अर्जुन पुरस्कार, 1999 में राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार, 1999 में पदमश्री और 2008 में पदम विभूषण से नवाजा जा चुका है।

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