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अब मोदी को पिछडा़ बताने में भाजपा को नहीं हिचक

लोकसभा चुनाव के मद्देनजर पिछडों को जोड़ने की होड़ इस कदर बढ़ गयी है कि अब तो जातिवाद की राजनीति का मुखर विरोध करने वाली भाजपा भी अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी को बढ़-चढ़कर पिछले वर्ग का बताने में हिचक नहीं रही है।

भाजपा ने जातिवाद की राजनीति का हमेशा विरोध करने का दावाकिया लेकिन पिछडों की राजनीतिक जागरुकता को देखते हुए अन्य दलों के साथ उसने भी इस वर्ग को अपने से जोड़ने की पुरजोर कोशिश में लग गयी है। 

पार्टी के कद्दावर नेता और नरेन्द्र मोदी के खास अमित शाह ने भी यह दांव चला और मोदी को पिछडे़ वर्ग का बताने में हिचक नहीं की। शाह ने कहा कि पिछडा़ वर्ग देश में इस समय निर्णायक स्थिति में है। यह वर्ग लगातार आगे बढ़ रहा है। कार्यकर्ता लोगों के बीच जाए और बतायें कि मोदी इसी वर्ग के हैं। पिछडे वर्ग के व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनाने के लिए एकजुट हो जाएं।

अतिपिछडों का उत्तर प्रदेश में करीब 36 प्रतिशत आबादी है। लोकसभा की कई सीटों पर इनकी भूमिका निर्णायक मानी जाती है। इसे देखते हुए राजनीतिक दल इन्हें रिझाने में लगे हुए हैं। सत्तारुढ़ समाजवादी पार्टी ने इस वर्ग को अपने साथ जोड़ने के लिए हाल ही में महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए आरक्षण के लिए आय सीमा पांच लाख रुपये से बढाकर आठ लाख रुपये कर दिया। 

इस वर्ग से जुडे अब उन लोगों को भी आरक्षण का लाभ मिलेगा जिसकी वार्षिक आमदनी आठ लाख रुपये तक है। सन् 1994 से अब तक यह आय सीमा पांच लाख रुपये थी। इसके साथ ही सपा ने समाजवादी पेंशन योजना लागू कर उसमें भी पिछडों के लिए 25 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की है। 

सपा ने सामाजिक न्याय यात्रा चलाकर निषाद, कश्यप, मल्लाह जैसी अतिपिछडी 15 जातियां को अनुसूचित जाति का दर्जा दिलाने का अभियान चला रखा है। यह यात्रा तीन चरणों में चल चुकी है जबकि चौथे चरण की यात्रा आगामी पांच फरवरी से शुरू होने वाली है। 

इनमें से प्रजापति और कुम्हार जाति को अनुसूचित जाति का दर्जा देने की अधिसूचना जारी कर दी। प्रदेश में इस जाति की आबादी करीब तीन प्रतिशत है।

आनन-फानन में यात्रा के संयोजक गायत्री प्रजापति को कैबिनेट मंत्री बनाया जाना भी इसी नजरिये से देखा जा रहा है। सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव पिछडों, दलितों और अल्पसंख्यकों को सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ देने के हरसम्भव प्रयास करने के निर्देश अपनी सरकार को दिये हैं। 

सपा प्रवक्ता और कारागार मंत्री राजेन्द्र चौधरी का कहना है कि पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव सभी वर्ग को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते हैं लेकिन अल्पसंख्यकों, समाज के दबे कुचले और पिछडों के लिए वह अधिक चिंतित रहते हैं।  

भाजपा भी इसमें पीछे नहीं है। भाजपा महासचिव और प्रदेश प्रभारी अमित शाह ने हाल ही में पार्टी में पिछडों के प्रकोष्ठ सामाजिक न्याय मोर्चा की बैठक ली थी जिसमें तय किया गया था कि आगामी 15 फरवरी से 15 मार्च तक मोर्चे का प्रदेशव्यापी सम्मेलन किया जायेगा। 

सम्मेलनों के जरिये खासतौर पर पिछडों को पार्टी से जोड़ने की कवायद की जायेगी। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक का कहना है कि इन बैठकों के जरिये पिछडों के हक को कथित रुप से एक वर्ग विशेष को देने की कोशिश से इस वर्ग को जागरुक कराया जायेगा।

पाठक ने बताया कि शाह यहां एक महत्वपूर्ण बैठक ले रहे हैं जिसमें अन्य मुद्दों के अलावा अन्य पिछडी जातियों को हर हाल में साधने की जरुरतों के बारे में बताया जा सकता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार मजहबी आधार पर ऐसी योजनाएं बना रही है जिसका सर्वाधिक नुकसान पिछडे़ वर्ग को ही उठाना पडे़गा क्‍योंकि उनके हिस्से की ही योजना में कटौती सम्भावित है। 

कांगेस पिछडे़ वर्ग के नेता के रुप में इस्पात मंत्री और कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य बेनी वर्मा को प्रोजेक्ट कर रही है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अमरनाथ अग्रवाल ने कहा कि जिन पार्टियों के पास वर्मा जैसा पिछडे़ वर्ग का नेता नहीं है वे इस वर्ग को अपने से जोड़ने का प्रयास करें। 

अग्रवाल ने कहा कि वर्मा की देखरेख में यहां दलित पिछडा, अल्पसंख्यक मंच का सम्मेलन हाल ही में हुआ था जिसमें पिछडे वर्ग के काफी लोग आये थे। उस सम्मेलन में पिछडों की भीड़ से ही साबित हो गया था कि कांग्रेस के प्रति इस वर्ग का लगाव बढा है।

बसपा ने पिछडों को जोड़ने के लिए कोई खुला अभियान तो नहीं चलाया है लेकिन बसपा की अपनी रणनीति है और वह संगठन का काम अपने ढंग से करती रहती है। बसपा स्वामी प्रसाद मौर्य और रामअचल राजभर सरीखे अपने नेताओं के माध्यम से इस वर्ग में लगातार काम कर रही है।

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