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बुन्देलखण्ड जगमगायेगा सौर ऊर्जा से

देश के अति पिछडे इलाकों में शुमार बुन्देलखण्ड अगले वर्ष से सौर ऊर्जा से जगमगायेगा। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस पिछडे क्षेत्र के लिये सौर ऊर्जा से चलनेवाले 110 मेगावाट की विद्युत परियोजनायें लगाने की कवायद शुरू की है। निजी क्षेत्र में लगने वाली इन परियोजनाओं के लिये सरकार और उद्योगपतियों में करार भी हो चुका है।

इन परियोजनाओं की खातिर भूमि अधिग्रहण की तैयारियां की जा रही हैं। सूत्रों ने बताया कि कुछ स्थानों पर भूमि का चयन कर लिया गया है और कुछ की तलाश की जा रही है हालांकि उन्होंने इसका ब्यौरा देने से मना कर दिया।

सूत्रों ने बताया कि सौर ऊर्जा से बनने वाली बिजली राज्य पावर कॉरपोरेशन को वितरण के लिये दे दी जायेगी लेकिन इसका अधिकांश हिस्सा बुन्देलखण्ड को ही मिलेगा। इस इलाके को 24 घन्टें बिजली आपूर्ति के लिये करीब 90 मेगावाट बिजली की आवश्यकता होगी। उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड इलाके में झांसी, हमीरपुर, जालौन, महोबा, बांदा और चित्रकूट जिले आते हैं। 

उन्होंने बताया कि सौर ऊर्जा से अभी मात्र 12 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। आने वाले तीस वर्षों में ऊर्जा का सबसे बडा़ स्रोत सौर ही होगा इसलिए इसे अभी से बढा़वा देना जरुरी है। उन्होंने बताया कि अभी आमतौर पर कोयले और पानी की मदद से बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। धीरे-धीरे कोयले की कमी आनी शुरू हो गयी है इसलिए सौर ऊर्जा को प्रोत्साहन दिया जाना नितान्त जरुरी है। 

उन्होंने बताया कि अभी ये परियोजनाएं केवल बुन्देलखण्ड इलाकेमें लगायी जा रही हैं लेकिन इनके बाद राज्य के दूसरे क्षेत्रों में भी इसका प्रयोग किया जायेगा। उनका कहना था कि बुन्देलखण्ड में पानी की कमी और जमीन की आसानी से उपलव्धता की वजह से उद्यमियों ने उसी क्षेत्र में अभी दिलचस्पी दिखायी है। 

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