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इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट: प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन का समन्वय

इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट: प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन का समन्वय

इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट एक शानदार करियर क्षेत्र है। इस फील्ड में अवसरों की कोई कमी नहीं है। इसमें करियर की संभावनाओं के बारे में बता रहे हैं संजीव कुमार सिंह

विश्व में तेजी से बढ़ते औद्योगिकीकरण के प्रभाव से भारत अछूता नहीं रहा और इसने भी अपना विस्तार करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यहां की अर्थव्यवस्था वैश्विक होती चली गई तथा कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां व्यापार के सिलसिले में यहां दस्तक देने लगीं। उनके आगमन व नीतियों से भारत को भी फायदा होने लगा। इससे यहां पर रोजगार के कई तरह के अवसर सामने आने लगे। इसी में से एक इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट भी है। यह भी मैनेजमेंट की ही एक शाखा के रूप में है, जिसके अंतर्गत कर्मचारियों की नियुक्ति, मेटीरियल, प्रोडक्शन, तकनीकी-मशीनी कार्यों की देखभाल, प्रोडक्शन के शेडय़ूल, उपकरणों की मरम्मत एवं क्वालिटी कंट्रोल जैसे कार्यो को अंजाम दिया जाता है, ताकि कंपनी की ग्रोथ को बढ़ाया जा सके।

बैचलर डिग्री से बनेगी बात
इसके लिए जो भी कोर्स तैयार किए गए हैं, उनमें प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन कार्यों को तरजीह दी गई है, इसलिए छात्रों को दिमागी रूप से इन दोनों के प्रति समर्पित होना होगा। साथ ही उन्हें बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में बैचलर होना जरूरी है। तभी उनका दाखिला एमबीए इन इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट में हो पाएगा। कुछ संस्थान इंजीनियिरग और टेक्नोलॉजी की बैचलर डिग्री को मान्यता देते हैं।

रेगुलर व ऑनलाइन कोर्स मौजूद
इंडस्ट्री में ग्रोथ के अलावा कई तरह के कोर्स भी मौजूद हैं, जिनमें प्रमुख रूप से पीजी डिप्लोमा, एमटेक, एमबीए व पीएचडी सरीखे कोर्स मौजूद हैं। इनकी अवधि दो साल से लेकर तीन साल तक है, जबकि ऑनलाइन एमबीए इन इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट का भी चलन है, जो कि मैन्युफैक्चरिंग ओरिएंटेड कोर्स है। अधिकतर लोग जॉब के दौरान इस कोर्स को करते हैं।

कब मिल सकता है दाखिला
इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट से संबंधित प्रमुख कोर्स में दाखिला कई रूपों में मिलता है। इसमें अधिकांश संस्थान कैट स्कोर को प्रवेश का आधार बनाते हैं। इसके अलावा कई संस्थान मिल कर अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षा का आयोजन करते हैं। कुछ संस्थान अपने स्तर पर भी प्रवेश परीक्षा आयोजित कर छात्रों के सपनों को साकार बनाते हैं।  

मैथमेटिकल स्किल्स जरूरी
इंडस्ट्रियल मैनेजर बनने के लिए सबसे पहले अपने अंदर मैथमेटिकल स्किल्स विकसित करनी होती हैं, क्योंकि प्रोफेशनल्स को बजट संबंधी कार्य भी करने पड़ते हैं। प्रोडक्शन चेन के प्रति समझ लाने, फाइनल आउटपुट की तस्वीर क्लीयर करने, निर्णय लेने, समस्या सुलझाने, प्रोडक्ट स्टैंडर्ड मेंटेन करने, प्रोडक्ट के रिकॉर्ड व रिपोर्ट को ऑनलाइन करने तथा अन्य विभागों के साथ काम के दौरान तालमेल बनाने का गुण काम के दौरान अधिक उपयोगी होता है।

जॉब की व्यापक संभावनाएं
आजकल सभी इंडस्ट्रीज को इंडस्ट्रियल मैनेजर की आवश्यकता है, इसलिए इनकी मांग बढ़ी है। अधिकांश  उद्योग क्वालिफाइड लोगों को अपने यहां ट्रेनिंग भी देते हैं, ताकि वे कुशल लोगों को अपने यहां रख सकें। एक इंडस्ट्रियल मैनेजर की मुख्य जिम्मेदारी प्रोडक्शन के प्लान एवं कंट्रोल का शेड्यूल तैयार करना है। इसके अलावा ये एकाउंट रिसोर्स, डेडलाइन्स, बजट आदि से जुड़े मामले भी देखते हैं। मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ कंसल्टेंट के रूप में भी इसमें अधिक संभावनाएं मिलती हैं। 

इस रूप में मिलता है काम

इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन मैनेजर
कंस्ट्रक्शन मैनेजर
कम्प्लेन ऑफिसर
प्रोडक्शन मैनेजर
ऑपरेशन मैनेजर
परचेज मैनेजर
क्वालिटी एश्योरेंस कंट्रोल मैनेजर
फेसिलिटी मैनेजर
आर्गेनाइजेशनल कंसल्टेंट

सेलरी
ट्रेंड प्रोफेशनल्स को इस क्षेत्र में आकर्षक वेतन दिया जा रहा है। यह वेतन बहुत कुछ उनकी योग्यता एवं अनुभव पर निर्भर करता है। इसमें ट्रेनी लेवल पर सेलरी 20,000-25,000 रुपए प्रतिमाह के हिसाब से शुरू होती है। जैसे-जैसे उनका अनुभव बढम्ता है, उनकी सेलरी भी बढ़ती जाती है। कई ऐसे प्रोफेशनल्स हैं, जिनका पैकेज लाखों में है। इस तरह से यह पैसे के मामले में भी हॉट करियर के रूप में उभर कर सामने आया है।

एजुकेशन लोन
छात्रों को प्रमुख राष्ट्रीयकृत, प्राइवेट अथवा विदेशी बैंकों द्वारा एजुकेशन लोन प्रदान किया जाता है। छात्र को जिस संस्थान में एडमिशन कराना होता है, वहां से जारी एडमिशन लेटर, हॉस्टल खर्च, ट्यूशन फीस एवं अन्य खचरे को ब्योरा बैंक को देना होता है। साथ ही अभिभावक/पेरेंट्स का आय संबंधी प्रमाण पत्र बतौर गारंटर जमा कराना अनिवार्य है। देश के लिए जहां अधिकतम 10 लाख रुपए का लोन है, वहीं विदेशों में अध्ययन के लिए इसकी अधिकतम राशि 20 लाख तय की गई है।

एक्सपर्ट्स व्यू
डॉ. एसए पिल्लई, एमडी
इंस्टीटय़ूट ऑफ इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट फॉर सेफ्टी, हेल्थ एंड इनवायर्नमेंट, भोपाल

कॉरपोरेट कंपनियों से लेकर विदेश तक में अवसर
इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट से संबंधित जो भी कोर्स हैं, वे अपने अंदर काफी विविधता समेटे हुए हैं। इसमें छात्रों को 60 प्रतिशत प्रेक्टिकल व 40 प्रतिशत थ्योरी की जानकारी दी जाती है। अब सेफ्टी मैनेजमेंट को भी इसमें शामिल कर देखा जाने लगा है। हालांकि दोनों के स्वरूप में काफी भिन्नता है। कुछ समय पहले तक इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट कोर्स का चलन नहीं था, लेकिन उदारीकरण के बाद न सिर्फ उच्च स्तर के कोर्सों का आगमन हुआ, बल्कि काम का दायरा भी तेजी से बढ़ा। आज स्थिति यह है कि डिमांड के हिसाब से प्रोफेशनल्स की सप्लाई नहीं हो पा रही है। मैन्युफैक्चिरग, प्रोडक्शन व मैनेजमेंट आदि कई जगहों पर इनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। कॉरपोरेट कंपनियों से लेकर विदेश तक उनके लिए पर्याप्त अवसर हैं। जहां तक लड़कियों का सवाल है तो उनके लिए इस प्रोफेशन में कोई मनाही नहीं है। अधिक संख्या में लड़कियां इससे संबंधित कोर्स में प्रवेश ले रही हैं और उसके बाद जॉब में खुद को साबित कर रही हैं।

फैक्ट फाइल
प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल इंजीनियिरग, मुंबई
वेबसाइट
- www.nitie.edu
कोर्स - पीजी डिप्लोमा इन इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट (दो वर्षीय)
पीजी डिप्लोमा इन इंडस्ट्रियल सेफ्टी एंड इनवायरमेंटल मैनेजमेंट (18 माह)

शैलेश ज़े मेहता स्कूल ऑफ मैनेजमेंट (आईआईटी मुंबई) मुंबई
वेबसाइट
- www.iitb.ac.in
कोर्स - एमटेक इन इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट (दो वर्षीय)
विनोद गुप्ता स्कूल ऑफ मैनेजमेंट (आईआईटी खडम्गपुर), खडम्गपुर
वेबसाइट
- www.iitkgp.ac.in
कोर्स - एमटेक इन इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट (दो वर्षीय)

दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, नई दिल्ली
वेबसाइट
- www.dce.edu
कोर्स - पीएचडी इन इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट (तीन वर्षीय)

इंडियन मैनेजमेंट स्कूल एंड रिसर्च सेंटर, नवी मुंबई
वेबसाइट
- www.imsrindia.com
कोर्स - एमबीए इन इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट (दो वर्षीय)

फायदे एवं नुकसान
आगे बढ़ने के मिलते हैं कई अवसर
पहचान बढ़ने पर सेलरी में तेजी से वृद्धि
कई विभागों से तालमेल बिठाना बड़ी चुनौती
लगातार कई घंटों तक काम करने पर थकान की नौबत

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