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हिम्मत और हौसले से कैंसर को मात दे रही जिंदगी

हिम्मत और हौसले से कैंसर को मात दे रही जिंदगी

कैंसर कोई लाइलाज बीमारी नहीं है। बस थोड़ी हिम्मत और हौसले की जरूरत होती है। मंगलवार को कैंसर सर्वाइवर डे के मौके पर हम कुछ ऐसे लोगों की आपबीती बताने जा रहे हैं, जिन्होंने यह साबित कर दिया है कि अगर जज्बा हो तो किसी भी बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सकता है। पेश है एक रिपोर्ट-

एक साल में कैंसर जड़ से खत्म हो गया
66 वर्षीय चंद्र रेखा को 1997 में कैंसर हुआ। इस बीमारी का पता लगने के बाद उन्होंने परिवार में किसी को नहीं बताया। मगर एक दिन हौसला करके उन्होंने अपने पति को यह बात बताई। पति ने तुरंत डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने कहा कि अब बहुत देर हो चुकी है। इलाज कराया तो अधिकतम तीन साल की जिंदगी है। इलाज न कराने पर एक ही साल जीया जा सकता है। मेरे इनकार के बाद भी पति ने इलाज कराया। आखिर चमत्कार हुआ और एक साल में कैंसर खत्म हो गया।

तीन बार कैंसर को मात दी
कमला श्रीनिवासन को तीन बार कैंसर से जूझना पड़ा और हर बार उन्होंने इस बीमारी को मात दी। पहला कैंसर 2008 में हुआ। नागपुर इंजीनियरिंग कॉलेज और लेडी इरविन कॉलेज में अध्यापिका रही कमला बताती हैं कि डॉक्टरों का कहना था कि मुझे जिस तरह का कैंसर है वैसा दुनिया में सिर्फ 50 लोगों को होता है। मगर मैंने हिम्मत नहीं हारी और वर्ष 2010 तक तीन बार इस बीमारी से जंग जीती।

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