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दौड़ रहीं खटारा स्कूल बसें, जांच ठंडे बस्ते में

मुजफ्फरपुर। कार्यालय संवाददाता। तीन माह पहले परवहिन विभाग की ओर से स्कूली बसों की जांच का दिया गया आदेश ठंडे बस्ते में चला गया है। फिटनेस व मानक की जांच नहीं हो रही है, जबकि खटारा बसें बेधड़क दौड़ रही हैं।

परिवहन विभाग के निर्देश पर डीटीओ मनन राम ने दो ताह पूर्व स्कूलों को नोटिस देकर उनकी बसों के संबंध में जानकारी मांगी थी। निर्देश के आलोक में निजी स्कूलों ने बसों की सूची एक माह पहले परवहिन कार्यालय में जमा कर दी।

इसके बावजूद बसों के मानक की जांच नहीं की जा रही है। अभिभावक मनोज सिंह ने बताया कि इस ठंड में भी जिस बस में बच्चों को ढोया जा रहा है, उसमें शीशे तक नहीं हैं। बैठने की सीट नहीं मिल पाती।

बच्चों ठंडी हवा खाते हुए स्कूल व घर पहुंचने को ववशि हैं। बैरिया निवासी अजय साह कहते हैं कि उनके बच्चों को ढोने वाली बस की सीटें टूटी हुई हैं। बार-बार फंस कर बच्चों के कपड़े फटते हैं और कई बार तो उन्हें चोट भी लग जाती है। पांच से पुरानी बसों को नहीं मिल रही स्कूल परमिटक्षेत्रीय परवहिन प्राधिकारी ने छह माह पहले ही पांच साल से पुरानी बसों को स्कूल का परमिट नहीं देने का फैसला किया था।

इस पर अमल करते हुए परमिट के चार आवेदन रद्द भी किये गए थे, लेकिन वर्तमान में निजी स्कूलों में बड़ी संख्या में पुरानी बसें बच्चों को ढोने में लगी हैं। अधिकारी बताते हैं कि जब पांच साल से पुरानी स्कूल बसों को परमिट ही नहीं दिया जा रहा है, तो फिर ये पुरानी बसें दौड़ कैसे रही हैं, यह जांच का विषय है।

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