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पतवाड़ी में अधिग्रहीत भूमि लौटाने के आदेश

ग्रेटर नोएडा। हमारे संवाददाता। ग्रेटर नोएडा वेस्ट (नोएडा एक्सटेंशन) के बहुचर्चित गांव पतवाड़ी में जमीन अधिग्रहण के मामले में हाईकोर्ट ने एक बार फिर प्राधिकरण को झटका दिया है। हाई कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई करते हुए जमीन अधिग्रहण रद्द किए जाने के फैसले को लागू न करने पर नाराजगी जताई है।

इसे न्यायालय की अवमानना करार दिया है। दरअसल पतवाड़ी के एक किसान ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की थी। इस पर अदालत ने कहा है कि चार सप्ताह में आदेश पर अमल किया जाए। पतवाड़ी गांव की 589.188 हेक्टेयर जमीन का जिला प्रशासन ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के लिए अधिग्रहण किया था। धारा-4 का प्रकाशन 12 मार्च 2008 को किया गया था। साथ ही अर्जेसी क्लॉज भी लगा दी गई। जमीन अधिग्रहण के खिलाफ दस किसान हाई कोर्ट चले गए।

किसान हरकरण सिंह आदि ने हाई कोर्ट को बताया कि उनकी जमीन का अधिग्रहण जबरन किया गया है। अधिग्रहण भी औद्योगिक विकास के लिए किया गया था, लेकिन इसे बिल्डरों को आवंटित कर दिया गया। किसानों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सुनील अम्बवानी व श्याम शंकर तिवारी की बेंच ने 19 जुलाई 2011 को जमीन अधिग्रहण रद्द करने का फैसला सुनाया था। इस फैसले की चपेट में ग्रेटर नोएडा वेस्ट के करीब एक दर्जन बिल्डर आ गए। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के आवासीय सेक्टर दो व तीन भी खतरे में पड़ गए।

इनमें एक सेक्टर में करीब 1,000 मकान बने हैं, जबकि दूसरे में 2000 प्लॉट हैं। इसी बीच कैबिनेट मंत्री ठाकुर जयवीर सिंह की अगुवाई में बनी समिति व ग्रामीणों के बीच 550 रुपये वर्ग मीटर अतिरिक्त मुआवजे पर फैसला हो गया। प्राधिकरण ने किसानों के बीच हुए समझौते को हाई कोर्ट में दायर किया और कहा कि किसानों का विरोध मुआवजा दरों को लेकर था। 64 फीसदी दरें बढ़ाए जाने को लेकर दोनों पक्षों में समझौता हो गया है। लिहाजा हाई कोर्ट की बड़ी बेंच ने 21 अक्टूबर 2011 को जमीन अधिग्रहण से प्रभावित सभी 39 गांवों के किसानों को बढ़ी दरों पर मुआवजा देने का फैसला सुना दिया।

प्राधिकरण ने इस फैसले पर अमल करते हुए करीब 4,000 करोड़ रुपये मुआवजा बांट भी दिया है, लेकिन विवाद एक बार फिर खड़ा हो गया है। सोमवार को हरकरण की याचिका पर फैसला सुनाते हुए जस्टिस विक्रम नाथ ने प्राधिकरण को किसानों की जमीन लौटाने के 19 जुलाई 2011 के फैसले पर अमल करने का आदेश दिया है। इसके लिए प्राधिकरण को चार सप्ताह का समय दिया गया है। अदालत का कहना है कि यदि इस बीच आदेशों पर अमल नहीं किया जाता तो इसे हाई कोर्ट की अवमानना माना जाएगा।

मं फिलहाल लखनऊ में हूं। सोमवार को हुए हाई कोर्ट के आदेशों के बारे में अभी जानकारी नहीं है। आदेश की प्रति मिलने पर उसका अध्ययन किया जाएगा और जरूरी कदम उठाए जाएंगे। - रमा रमण, सीसीईओ ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणग्रेटर नोएडा अथॉरिटी को फैसला मानना ही होगा। 19 जुलाई 2011 का फैसला न्यायिक फैसला था। बाद का फैसला पंचायत का है जिसका कोई वजूद नहीं है। - पंकज दुबे, किसानों के वकीलहमने जबरदस्ती जमीन अधिग्रहण किए जाने के खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी है।

हाई कोर्ट के फैसले से हम संतुष्ट हैं। लेकिन अब भी प्राधिकरण इन आदेशों पर अमल नहीं करता है तो देश की सर्वोच्च अदालत में अथॉरिटी को चुनौती देंगे। - टीकम सिंह, किसान नेतां।

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