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दिल्ली लोकपाल बिल को कैबिनेट से मंजूरी

दिल्ली लोकपाल कानून के मसौदे को सोमवार को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में इसे हरी झंडी दी गई। अब इसे विधानसभा में पेश किया जाएगा। आम आदमी पार्टी के लिए यह बड़ी सफलता है।

केंद्र को नहीं भेजेंगे बिल: राजस्व मंत्री मनीष सिसौदिया ने बताया कि दिल्ली सरकार केंद्र की मंजूरी लिए बिना इसे विधानसभा में पेश करेगी। सिसौदिया ने कहा कि कैबिनेट से इस कानून को मंजूरी मिलना एक महत्वपूर्ण कदम है। अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली ‘आप’ ने चुनाव में दिल्ली के लिए सख्त लोकपाल कानून बनाने का वादा किया था।

उत्तराखंड की तर्ज पर तैयार किया बिल: सिसौदिया ने बताया कि प्रस्तावित विधेयक उत्तराखंड के लोकपाल कानून की तर्ज पर तैयार किया गया है लेकिन यह कुछ मामलों में उससे बेहतर है। इसके दायरे में मुख्यमंत्री से लेकर किसी भी विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक सभी अधिकारी आएंगे। साथ ही उत्तराखंड से इतर दिल्ली में मुख्यमंत्री या किसी मंत्री के खिलाफ शिकायत पर लोकपाल की पूर्ण पीठ द्वारा जांच करना जरूरी नहीं होगा। पीठ का कोई भी सदस्य इसकी जांच कर सकेगा।

दिल्ली लोकपाल कानून में क्या खास होगा: सभी के खिलाफ जांच की प्रक्रिया एक समान होगी। अभी तक लोकायुक्त के पास अलग जांच का इंतजाम नहीं था। लोकपाल का 11 सदस्यीय पैनल मामलों की सुनवाई करेगा। पहले उपलोकायुक्त का प्रावधान तो था लेकिन कभी नियुक्त नहीं हुए। कानूनी उलझनों के बिना दंड मिलने की अनिवार्यता विधेयक की सबसे अहम विशेषता है।

सात सदस्यीय पैनल दस सदस्यीय लोकपाल पैनल का चयन करेगा। चयनमंडल में दो ही राजनीतिक व्यक्ति (मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष) होंगे बाकी सब चयनकर्ता कानून और अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञ होंगे। इसके अलावा भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले व्हिसिल ब्लोअर को कानूनी संरक्षण मिलेगा। अभी तक उसे कोई संरक्षण नहीं था। मुख्यमंत्री, मंत्री या आला अधिकारी सहित किसी को विशेषाधिकार नहीं मिलेगा। भ्रष्टाचार के मामले में आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान होगा। अभी तक लोकायुक्त सिर्फ कार्रवाई करने की राष्ट्रपति को सिफारिश कर सकते थे।

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