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संसद सत्र में तेलंगाना विधेयक को लेकर हंगामे के आसार

संसद सत्र में तेलंगाना विधेयक को लेकर हंगामे के आसार

15वीं लोकसभा के बुधवार से शुरू हो रहे अंतिम सत्र में जबर्दस्त हंगामा होने के आसार हैं जिसमें सरकार विवादास्पद तेलंगाना विधेयक को लाने की योजना बना रही है वहीं विपक्षी दल मुख्य रूप से अंतरिम बजट पारित होने पर जोर दे रहे हैं।

सरकार के प्रबंधकों को इस बात की फिक्र है कि सत्र में लेखानुदान को छोड़कर अन्य कोई विधायी कार्य हो पाएगा या नहीं क्योंकि वाम दल और भाजपा समेत विपक्षी दल अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। संसद के शीतकालीन सत्र के दूसरे चरण में भ्रष्टाचार रोधी छह विधेयकों सहित कुल 39 विधेयक सूचीबद्ध हैं।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने कहा कि सदन में व्यवधान के लिए कांग्रेस विपक्ष पर तोहमत नहीं लगा सकती। यह स्थिति केवल कांग्रेस की ही बनाई हुई है। सत्तारूढ़ दल देश और सदन में इतना कमजोर हो गया है कि उसके एक राज्य के खुद के मुख्यमंत्री ने तेलंगाना विधेयक को आंध्रप्रदेश विधानसभा से अस्वीकार कराके केन्द्र को वापस भेज दिया है।

संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ ने सर्वदलीय बैठक के बाद यहां संवाददाताओं से कहा कि सभी पार्टियों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर भ्रष्टाचार रोधी छह विधेयक पारित कराने में सरकार का सहयोग करना चाहिए। तीन विपक्षी पार्टियों का कहना है कि सरकार इस सत्र में केवल लेखानुदान पारित कराए। जहां तक विधेयकों का सवाल है, आगामी लोकसभा चुनाव के बाद बनने वाली नई सरकार उन्हें देखेगी।

सरकार के सू़त्रों के अनुसार राजग के कार्यकारी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी और सुषमा ने भी वित्त मंत्री पी चिदंबरम से कहा है कि लेखानुदान को जल्दी से जल्दी पारित कराया जाए। सूत्रों के मुताबिक हालांकि चिदंबरम ने 17 फरवरी से पहले लेखानुदान पारित होने में असमर्थता जताई क्योंकि अंतरिम बजट पेश करने में काफी प्रयास करने पड़ेंगे।

संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने छह विधेयकों को पारित करने का अनुरोध किया है लेकिन इसका कुछ खास असर नहीं दिखाई देता। संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि मुख्य विपक्षी दल तेलंगाना विधेयक को पारित कराने में अड़चन डालना चाहता है और इसके लिए बहाने ढूंढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सभी दलों को अगर-मगर लगाने की बजाय तेलंगाना विधेयक पर अपना रुख एकदम स्पष्ट करना चाहिए।

सर्वदलीय बैठक के बाद माकपा के सीताराम येचुरी और तणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय सहित कई दलों के नेताओं ने कहा कि सरकार को पहले लेखानुदान पारित कराने पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि इस बात की आंशका है कि पिछली कुछ बार की तरह इस मरतबा भी तेलंगाना मुद्दे पर सदन की कार्यवाही को ठप्प किए जाने का प्रयास किया जाए। येचुरी ने आरोप लगाया कि तेलंगाना मुद्दे पर सरकार खुद सदन में अव्यवस्था बनाना चाहती है।
   
सुषमा ने कहा कि हमें भ्रष्टाचार निरोधी विधेयकों को लेकर कोई आपत्ति नहीं है। सवाल यह है कि कांग्रेस के सदस्य संसद का काम काज चलने देंगे अगर सदन को चलने दिया गया तो हम निश्चित तौर पर विधेयकों को पारित करेंगे। शीतकालीन सत्र की इस विस्तारित बैठक की अवधि में कटौती किए जाने का सुझाव देते हुए तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि इसे 17 से 21 फरवरी तक पांच दिन के लिए चलाना चाहिए। समाजवादी पार्टी और जदयू ने सत्र को 12 से 21 फरवरी तक करने को कहा।

तृणमूल नेता बंदोपाध्याय ने कहा कि नई सरकार को आने दीजिए और उसे मामलों से निपटने दें। उन्होंने कहा कि सरकार 40 से अधिक विधेयक पारित कराने का प्रस्ताव लेकर आई है मगर वह जानती है कि वह उन्हें पास नहीं करा पाएगी। येचुरी ने गेंद सरकार के पाले में डालते हुए सुझाव दिया कि अगर सरकार विधेयक पारित कराना चाहती है तो उसे उस रणनीति को सामने रखना चाहिए जिससे तेलंगाना मुद्दे से निपटा जा सके और उसके कारण सदन की कार्यवाही बाधित नहीं हो।

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