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अलविदा पीट सीगर

अमेरिका के मेनहट्टन प्रांत में 1919 में मई दिवस के दो दिन बाद पीट सीगर का जन्म हुआ था और वह इस जनवरी के आखिरी दिनों में इस दुनिया से विदा हो गए। विरोध प्रदर्शनों में गाये जाने के लिए वह एक बेहद खूबसूरत गीत छोड़ गए हैं- हम होंगे कामयाब एक दिन। दुनिया का ऐसा कौन-सा कोना होगा, जहां विश्वास और अमन के लिए संघर्षरत लोगों ने इसे अपने दिल पर हाथ रखकर न गाया हो! हर भाषा में इस गीत का अनुवाद हुआ और इसे पीट सीगर की धुन ने अलग अलग जुबानें बख्शीं। चाल्र्स अलबर्ट के मूल गीत ‘आई विल ओवरकम वनडे’ को नई शक्ल ‘वी विल ओवरकम’ के रूप में मिली। अफ्रीकी और अमेरिकी जन संघर्षों में गाए जाने वाले इस गीत को पहले पहल 1948 में गाया गया। सीगर की लोक गायकी ने इसे अंतरराष्ट्रीय गीत बना दिया। आज दुनिया के धर्म और उनके भीतर के फिरके मासूमों की जान लिए जा रहे हैं।

हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई की साझा संस्कृति वाले हमारे देश में भी धार्मिक भेदभाव और घृणा के हादसे हो रहे हैं, बल्कि इसी घृणित विषय को गर्व का विषय बनाकर राजनीतिक लक्ष्य प्राप्त करने का काम किसी तरह का अपराध-बोध भी नहीं बुन पा रहा है। हमने इंसानियत को धर्म के परदों के पीछे छिपा दिया है। आदमी को आदमी से दूर करने की साजिश के इस दौर में यही वह गीत है, जो कहता है कि हम चलेंगे साथ-साथ, डाले हाथों में हाथ एक दिन। क्या सचमुच वह दिन सबसे श्रेष्ठ न होगा?
हथकढ़ ब्लॉग से

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