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अब पेस और भूपति से फोकस हटाना होगा: सोमदेव

अब पेस और भूपति से फोकस हटाना होगा: सोमदेव

लिएंडर पेस और महेश भूपति के अनुभव के बगैर डेविस कप मुकाबले में चीनी ताइपे पर भारत की जीत के मद्देनजर देश के शीर्ष एकल टेनिस खिलाड़ी सोमदेव देववर्मन का मानना है कि अब इन दोनों अनुभवी खिलाड़ियों पर से फोकस हटाकर युवाओं पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।

भारत ने डेविस कप एशिया ओशियाना ग्रुप एक में चीनी ताइपे को 5-0 से हराया। सोमदेव ने कहा कि टीम हमेशा पेस और भूपति की ऋणी रहेगी, लेकिन अब आगे देखने का समय है। एटीपी रैंकिंग में 103वें स्थान पर काबिज सोमदेव ने राष्ट्रीय महासंघ के खिलाफ खिलाड़ियों की बगावत में अपनी भूमिका और भारतीय टेनिस खिलाड़ी संघ के गठन के बारे में भी बात की।

उन्होंने कहा कि अब लिएंडर और महेश पर से फोकस हटाना होगा। युवाओं पर फोकस करने की जरूरत है। नये कप्तान पर करने की जरूरत है, क्योंकि यही भविष्य है। हम एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं। लिएंडर और महेश ने जो कुछ हमें दिया, हम उनके आभारी हैं, लेकिन अब आगे बढ़ना होगा। हमें उपलब्ध खिलाड़ियों के साथ सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा।

अपनी शैली की आलोचना पर उन्होंने कहा कि अपने खेल को लेकर वह अडिग हैं और बदलने वाले नहीं। उन्होंने कहा कि जब हालात आपके अनुकूल नहीं होते तो सब कुछ खिलाफ हो जाता है और जब आपके अनुकूल होते हैं तो सब अच्छा लगता है। टेनिस का सत्र लंबा होता है और करियर भी। ऐसे में हतोत्साहित होने की जरूरत नहीं है। मेरा मानना है कि मैं अपने आत्मविश्वास के दम पर ही यहां तक पहुंचा हूं।

उन्होंने कहा कि जब आत्मविश्वास कम हो जाता है और फिर छोटी-छोटी बातें सामने आती हैं मसलन डिफेंस सही नहीं है वगैरह, लेकिन जब आत्मविश्वास होता है तो आपके सवाल भी बदल जाते हैं। मुझे लगता है कि हालात बदलने में कुछ मैचों का फर्क होता है। इसीलिये मेरा फोकस अपनी फिटनेस और खेल पर है।

यह पूछने पर कि क्या वह अपने खेल को और आक्रामक नहीं बनाना चाहते, उन्होंने कहा कि लगातार सुधार की गुंजाइश हमेशा रहती है। सोमदेव ने कहा कि लगातार सुधार की इच्छा होना जरूरी है। मुझे अपने रिटर्न पर और आक्रामक होना होगा और अधिक वॉली लगानी होगी, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि मेरी पहचान मेरे खेल के कारण ही है। थोड़ा बहुत बदलाव संभव है मसलन एक मैच में दस प्रतिशत, लेकिन जहां 150 प्रतिशत मैं अपने हिसाब से ही खेलूंगा।

यह पूछने पर कि क्या खिलाड़ी के लिये मानसिकता बदलना कठिन होता है, उन्होंने हां में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह बहुत कठिन है। मानसिक तौर पर यह सबसे कठिन काम है। वीरेंद्र सहवाग जैसे खिलाड़ी से मानसिकता बदलकर राहुल द्रविड़ की तरह खेलने को कहा जाये या द्रविड़ से कहें कि वह सहवाग की तरह खेलें। यह बहुत कठिन है।

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