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डीटीयू बीटेक कोर्स में प्रवेश

डीटीयू बीटेक कोर्स में प्रवेश

मैं बी.ए. (प्रथम वर्ष) में मैकेनिकल प्रोडक्शन (डिप्लोमा) की अंतिम वर्ष का छात्रा हूं। मुझे दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी में बीटेक में दाखिले के बारे में जानकारी दें।
प्रीति चौहान, बस्ती

दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (डीटीयू) अपने बीटेक कोर्स के द्वितीय वर्ष में प्रवेश देती है। यह सिर्फ उनके लिए होता है, जो इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कर रहे हों और जिन्होंने संबंधित क्षेत्र में स्नातक किया हो। डीटीयू के बीटेक के द्वितीय वर्ष में प्रवेश पाने की अनिवार्य योग्यता के तहत जरूरी है कि आपने तीन साल का मान्यताप्राप्त इंजीनियरिंग डिप्लोमा न्यूनतम 60 फीसदी अंकों के साथ (एससी/एसटी/ओबीसी के लिए 50 फीसदी अंक) उत्तीर्ण किया हो।

इसमें चयन मेरिट के आधार पर होता है। वैसे डीटीयू भौतिक शास्त्र, रसायन शास्त्र और गणित पर आधारित एक एग्जाम और इंटरव्यू भी करा सकता है। द्वितीय वर्ष के कोर्स की भी फीस वही होती है, जो नियमित बीटेक कोर्स की होती है। बीटेक की विभिन्न ब्रांचों में कितनी-कितनी सीटें उपलब्ध हैं, यह जानने के लिए आप डीटीयू की वेबसाइट www.dtuadmissions.nic.in पर क्लिक कर सकते हैं।

मैं बीएससी (भौतिक शास्त्र) के प्रथम वर्ष का छात्र हूं। क्या आप मुझे बता सकते हैं कि स्नातक पूरा करने के बाद और इसी क्षेत्र में मास्टर डिग्री करने के बाद जॉब के क्या-क्या अवसर होते हैं? इस क्षेत्र में गणित के साथ आगे बढ़ना कितना अहम होता है? क्या इस क्षेत्र में सिर्फ रिसर्च का ही काम होता है?
एक पाठक

भौतिक शास्त्र के तहत आपको ब्रह्मांड की हर छोटे से बड़े तथ्य का अध्ययन कराया जाता है, उसकी प्रकृति से लेकर उसकी कार्यप्रणाली तक के बारे में जानकारी दी जाती है। यह सभी जानकारी वैज्ञानिक प्रगति के आधार पर होती है।

प्रयोगशालाओं में काम करने के अलावा भौतिक शास्त्री नए-नए उपकरणों के निर्माण में भी सहयोग करते हैं। सेटेलाइट से लेकर मैग्नेटिक फील्ड के अध्ययन में काम आने वाले तमाम उपकरणों में भौतिक शास्त्री की अहम भूमिका होती है। वास्तव में आधुनिक सुविधाओं में से अधिकांश भौतिक शास्त्र के जरिए संभव हो पाई हैं।
मेडिकल के क्षेत्र में उपयोगी तकनीकों में कई का सीधे-सीधे वास्ता भौतिक शास्त्र से ही है और वर्ल्ड वाइड वेब यानी डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू के संचालन और संप्रेषण में भी भौतिक शास्त्र की अहम भूमिका है। वैसे अभी तक की पढ़ाई में आप यह तो समझ ही गए होंगे कि गणित भौतिक शास्त्र का अभिन्न अंग है। वास्तव में भौतिकी के तमाम फॉर्मूलों में गणित की अहम भूमिका होती है। कभी-कभी तो गणित से ही नए-नए फॉर्मूलों की रचना होती है। भौतिक शास्त्र ऐसा विज्ञान है, जो काफी व्यवहारिक होता है। वैसे इस कोर्स में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए आपको गणित की समझ होनी ही चाहिए। मूल रूप से भौतिक शास्त्र के तमाम फॉर्मूलों को गणित के आधार पर ही बनाया जाता है और क्रियान्वयन किया जाता है। भौतिक शास्त्री के तौर पर आप करियर के विभिन्न आयामों पर काम कर सकते हैं। आप इस क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त कर प्रयोगशालाओं या विश्वविद्यालयों में रिसर्च का काम कर सकते हैं। कई पीएचडी करने वाले छात्र अच्छी स्कॉलरशिप और जेआरएफ में प्रवेश पा रहे हैं। नैनोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी इस क्षेत्र के लोगों के लिए प्रबल संभावनाएं हैं। 

एमएससी के अलावा आप न्यूक्लियर फिजिक्स और नैनोसाइंस में एमटेक भी कर सकते हैं। मेडिकल की फील्ड में रेडियोलॉजी कर भौतिक शास्त्री के तौर पर भी काम कर सकते हैं। आप भारतीय सेना में विशेष तौर पर एयरफोर्स और नेवी का भी हिस्सा बन सकते हैं। कुल मिला कर भौतिक शास्त्री के तौर पर आपके पास विकल्पों का अंबार होता है। नई-नई उत्पतियों के जरिए आप स्वयं का कोई बिजनेस भी खड़ा कर सकते हैं।

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