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ऑनलाइन लें ईडब्ल्यूएस सीटों का ब्योरा

ऑनलाइन लें ईडब्ल्यूएस सीटों का ब्योरा

नर्सरी दाखिले में पंजीकरण के लिए सिर्फ तीन दिन बाकी हैं। पांच फरवरी अंतिम तिथि है। ईडब्ल्यूएस वर्ग में सबसे अधिक आवेदन आ रहे हैं। लेकिन कहीं अधिक सीटें हैं तो कहीं इस वर्ग के लिए कम सीटें हैं। कम सीटों वाले स्कूल में अब आवेदन करने से बचें। सीटों की जानकारी ऑनलाइन हो गई है। निदेशालय की साइट से जोन के हिसाब से स्कूलों में सीटों की संख्या देखकर आवेदन करें।

शिक्षा निदेशक पद्मिनी सिंघला कहती हैं कि दिल्ली के हर जोन के स्कूलों की सूची www.edudel.nic.in वेबसाइट पर है। किस जोन में कौन सा स्कूल है, वहां कितनी सीटें हैं, उन्हें कैसे दिया जाएगा, इस बाबत तमाम जानकारियां उपलब्ध हैं। उनका कहना है कि अंतिम दिन बचे हैं। ऐसे में उन स्कूलों में आवेदन करना चाहिए जहां अधिक सीटों हों। कम सीटों वाले स्कूल में मुकाबला कड़ा होगा क्योंकि इस वर्ग के दाखिले ड्रॉ से होते हैं। बता दें कि निजी स्कूलों में इस वर्ग की 25 फीसदी सीटें आरक्षित हैं।

सामान्य वर्ग में हर स्कूल में ड्रॉ की स्थिति: पहली बार सामान्य वर्ग के बच्चों को किस्मत के भरोसे रहना पड़ेगा। दरअसल, दूरी वर्ग के 70 प्वाइंट तय होने से हर स्कूल में अधिक आवेदन आ रहे हैं। हर दूसरे अभिभावक के बच्चे को 80-80 प्वाइंट मिल रहे हैं। ऐसी स्थिति में एक समान प्वाइंट होंगे। समान प्वाइंट होने से हर स्कूल में ड्रॉ की स्थिति बनती दिख रही है। ड्रॉ में पर्ची निकलने वाले को ही सीट मिलेगी। नियम के मुताबिक, यदि दूसरा ड्रॉ में नहीं चुना जाता है तो वो सीटें भरने की स्थिति में दाखिले के लिए दावा नहीं कर पाएगा। इसे देखते हुए अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।

अंतिम दिन ऑनलाइन आवेदन रात दो बजे तक
स्कूलों ने कम दिन देखते हुए अभिभावकों को बड़ी राहत दी है। वैसे तो ऑनलाइन पंजीकरण सुबह नौ बजे से रात 12 बजे तक है लेकिन स्कूल संघ के सचिव विपुल भारद्वाज ने बताया कि सभी ने ऑनलाइन आवेदन का समय  रात दो बजे तक बढ़ा दिया है। इतना ही नहीं, जहां फॉर्म की कीमत बैंक के डिमांड ड्राफ्ट के तौर पर ली जा रही है वहां इस शर्त को हटा दिया गया है। अभिभावक सीधे क्रेडिट और डेबिट कार्ड से शुल्क का भुगतान कर सकते हैं। इसके अलावा आवेदन फॉर्म डाउनलोड करने का समय भी बढ़ा दिया गया है।

सिबलिंग, एल्यूमनी निभाएंगे बड़ी भूमिका
अमूमन सिबलिंग और एल्यूमनी के तहत कम आवेदन देखने को मिलते हैं। बावजूद इसके ये दोनों आंकड़ों के गणित को सुलझाने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। सबसे ज्यादा राह आसान उन अभिभावकों की होगी जो सिबलिंग और एल्यूमनी दोनों श्रेणी में आते हैं। मान लीजिए किसी बच्चे के माता-पिता ने एक स्कूल से पढ़ाई की है। उनका पहला बच्चा भी उसी स्कूल में पढ़ता है और वे अन्य मानक भी पूरा करते हैं तो ऐसे अभिभावक के नौनिहाल दोनों श्रेणियों का फायदा उठाकर दाखिला पा सकेंगे। पहली कटऑफ में ये दोनों श्रेणियां बड़ा फेरबदल कर सकती हैं। अभिभावक कमल कहते हैं, ‘उम्मीद हैं दोनों के जोड़ से बेटे को सीट मिलेगी।’

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