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तसलीमा नसरीन ने छोड़ी कोलकाता लौटने की उम्मीद

तसलीमा नसरीन ने छोड़ी कोलकाता लौटने की उम्मीद

पश्चिम बंगाल सरकार के रवैये से आजिज आ चुकी विवादित बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने कहा कि इस तरह के प्रतिबंध एक लेखक की असल मौत है और अब उन्होंने कोलकाता लौटने की उम्मीदें छोड़ ही दी है।
    
कोलकाता में चल रहे पुस्तक मेले में उनकी किताब निशिद्धो उपलब्ध है, लेकिन उन्हें इसमें भाग लेने की अनुमति नहीं दी गई। वर्ष 2012 में इसी मेले में उनकी किताब निर्बासन का लांच रद्द कर दिया गया था और तसलीमा को डर है कि इस बार भी उनकी किताब मेले से हटा दी जायेगी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में हालात बिल्कुल नहीं बदले हैं और उन्हें वापसी की कोई उम्मीद नहीं है।
     
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में हालात बांग्लादेश जैसे हैं। बंगाल सरकार ने मेरे प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। मेरी किताबें और मेरे द्वारा लिखे सीरियल पर भी प्रतिबंध लग गया है। माकपा सरकार के दौरान ऐसा हुआ और मुझे लगा था कि ममता बनर्जी के सत्ता में आने के बाद हालात बदलेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
     
उन्होंने कहा कि मुझे डर है कि मेरी किताब निशिद्धो भी मेले में ज्यादा दिन नहीं रहेगी, लिहाजा मैने ट्वीट किया कि जिन्हें खरीदना हो, वे जल्दी खरीद लें। वे मेरी किताबों पर प्रतिबंध लगा रहे हैं और यह एक लेखक की असल मौत है। 2012 में ऐसा हुआ और फिर ऐसा हो सकता है। यदि यही हालात रहे तो बंगाल भी बांग्लादेश या पाकिस्तान बन जायेगा, जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है।
   
तसलीमा ने कहा कि उनके महिलापरक लेखन के बावजूद महिला नेताओं की हमदर्दी उन्हें नहीं मिल सकी है। उन्होंने कहा कि यह अजीब है कि मैं पिछले तीन दशक से महिलाओं के बारे में लिख रही हूं, लेकिन तीन महिलाओं (शेख) हसीना, खालिदा (जिया) और ममता (बनर्जी) ने मेरा जीवन दूभर कर दिया है। बांग्लादेश लौटने की कोई उम्मीद तो बची नहीं। मैं कोलकाता जाना चाहती थी, क्योंकि मेरी संस्कृति बंगाली संस्कृति ही है। लेकिन अब मैने लौटने की उम्मीद छोड़ दी है।

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  • Web Title:तसलीमा नसरीन ने छोड़ी कोलकाता लौटने की उम्मीद