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आसन में घटी विदेशी परिंदों की संख्या

 विकासनगर/कार्यालय संवाददाता। विदेशी परिंदों की चहक से गुलजार रहने वाले आसन बैराज झील से इस बार पक्षी खफा से नजर आ रहे हैं। दस वर्षो से लगातार बढ़ रही विदेशी परिंदों की संख्या से खुश लोगों के लिए इस बार अच्छी खबर नहीं है।

फरवरी शुरू हो गया है और मार्च में विदेश परिंदे अपने देशों को वापस लौटना शुरू कर देते हैं लेकिन अभी तक यहां पिछले साल की तुलना में आधे भी पक्षी नहीं पहुंचे हैं। इससे पक्षी प्रेमी चिंतित हैं तो पक्षी विशेषज्ञ शोध की आवश्यकता पर बल देते हैं। आसन बैराज झील में सत्तर के दशक में विदेशी परिंदों ने आना शुरू किया। विभिन्न देशों साइबेरिया, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, अरब देशों, चीन, लद्दाख आदि क्षेत्रों से आने वाले इन पक्षियों की संख्या लगातार बढ़ती रही।

विभिन्न देशों से आने वाले विदेशी परिंदे अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में आना शुरू होते हैं और मार्च तक यहां प्रवास करते हैं। मार्च के अंत में वापस जाना शुरू कर देते हैं। वर्ष 2000 से पहले सैकड़ो पक्षी आते थे। लेकिन इसके बाद 2010 तक इन पक्षियों की संख्या सात से आठ हजार तक पहुंच गयी। वर्ष 2012-13 में रिकार्ड दस हजार से भी अधिक 45 प्रजातियों के विदेशी पक्षियों ने आसन बैराज और पांच सौ से अधिक पक्षियों ने डाकपत्थर बैराज में डेरा डाला।

लेकिन इस बार फरवरी शुरू हो गया है। लेकिन अभी तक आसन बैराज झील में मात्र साढ़े चार हजार विदेशी परिंदे जिनमें महज 26 प्रजातियों रेड सुर्खाव, पिंटेल, रुडिक शल्डक, कामन कूट, नार्दन शोवलर, परपल्स स्वेम फैन, पांड हेरन, वेर्स्टन रीफ हेरौन, गोल्डन आई, ग्रेट विरनी, क्रेस्टेड ग्रवि आदि ही पहुंचे हैं। इतनी कम संख्या में पक्षियों के पहुंचने से पक्षी विशेषज्ञ हैरान हैं। पक्षी विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि कम संख्या में पक्षियों का पहुंचना चिंता का विषय तो नहीं है। लेकिन शोध का विषय है। इस पर शोध किया जाना चाहिए।

 

विदेशी पक्षी स्वतंत्र और शांत वातावरण में रहना पसंद करते हैं। आसन बैराज झील के किनारे हाईवे से पक्षियों के जीवन में खलल पड़ने से पक्षी इधर-उधर जाने लगे हैं। झील में पक्षियों के प्रवास के दौरान वोटिंग पर पूरी तरह से रोक लगनी चाहिए। वाइल्ड लाइफ इस्टीटय़ूट ऑफ इंडिया को इस बारे में पहल कर शोध करना चाहिए कि इस बार पक्षी कम क्यों आये। अजय शर्मा, पक्षी विशेषज्ञ देहरादूनबाक्स।

इस बार गणना करने पर महज साढ़े चार हजार पक्षी आये हैं। छब्बीस प्रजाति के पक्षी पहुंचे हैं। यह शोध का विषय है कि इस बार पक्षी कम क्यों आये हैं। डॉ.दविाकर सिन्हा, डीएफओ चकराता वन प्रभागं।

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