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विधायक निधि को बंद करने की तैयारी में दिल्ली सरकार

दिल्ली सरकार ने अपने घोषणापत्र में किए वादे के अनुसार विधायक निधि को बंद करने की तैयारी कर ली है। इस पैसे को मोहल्ला सभाओं के माध्यम से खर्च करने की योजना है। इसी के तहत दिल्ली सरकार स्वराज कानून पर मशक्कत करने में लगी है।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने स्वराज कानून को मूर्तरूप देने के लिए विधायक निधि के साथ ग्रामीण, स्लम और कच्ची कालोनी विकास बोर्ड जैसे अन्य संगठनों के  माध्यम से खर्च होने वाली विकास निधि को भी फौरीतौर पर बंद कर दिया है। राजस्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि विधायक निधि या अन्य मदों में कोष जारी न करने के लिए अभी मौखिक आदेश ही दिए गए हैं। भाजपा और कांग्रेस के विधायकों ने जब सरकार से पैसा न मिलने के बारे में जानकारी मांगी तो पता चला कि फिलहाल विधायक निधि का शून्य बजट कर दिया गया है। 28 दिसंबर को केजरीवाल सरकार के गठन के बाद विभिन्न स्तरों पर इलाके के विकास में स्थानीय जनता की निर्णायक भूमिका बनाने के लिए इन मदों में जारी होने वाले फंड पर जनवरी से ही रोक लगी हुई है।

दिल्ली सरकार के राजस्व मंत्री मनीष सिसोदिया ने स्पष्ट किया है कि सरकार का इरादा विधायक निधि और तमाम बोर्ड सहित अन्य माध्यमों से खर्च हो रही विकास राशि का निर्धारण जनता के हाथ में सौंपना है। इसलिए इसे आंशकालिक तौर पर रोका गया है। मध्य प्रदेश में स्वराज की अवधारणा पर काम कर चुके रिटायर्ड आईएएस अधिकारी जीएस बेहर दिल्ली के लिए स्वराज कानून बना रहे हैं।

‘आप’ को 48 घंटे का अल्टीमेटम
नई दिल्ली

तमाम जतन के बाद बनी दिल्ली सरकार की मुसीबतें कम नहीं हो रही हैं। बागी विधायक विनोद कुमार बिन्नी के साथ विधायक शोएब इकबाल और रामबीर शौकीन ने रविवार को पांच असुतंष्ट विधायकों का साथ होने का दावा करते हुए केजरीवाल सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया है। उन्होंने पूछा है कि बिजली, महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
(प्र.सं.)   

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