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‘मंडेला’ बनाने में लग गए 22 साल

नवंबर 2013 में दुनिया को अलविदा कहने वाले रंगभेद विरोधी आंदोलन के महानायक नेल्सन मंडेला शनिवार को राष्ट्रपति भवन में ‘लाइव’ थे। मौका था महान गांधीवादी नेता के जीवन पर बनी फिल्म ‘मंडेला: ए वॉक टू फ्रीडम’ के खास स्क्रीनिंग का। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने खास मेहमानों के साथ 152 मिनट की इस फिल्म को देखा। दक्षिण अफ्रीका के रंगभेद विरोधी नेता गांधीजी के सिद्धांतों से प्रभावित थे तो उनके जीवन पर बनी फिल्म का भी भारत की मिट्टी से जुड़ाव है।

मंडेला की आत्मकथा ‘अ वॉक टू फ्रीडम’ पर आधारित फिल्म के  प्रोड्यूसर हैं अनंत सिंह। वीडियोविजन इंटरटेनमेंट के सीईओ अनंत के परदादा गन्ने के खेत में श्रमिक के तौर पर दक्षिण अफ्रीका पहुंचे थे। अनंत संकोचपूर्ण मुस्कान के साथ बताते हैं कि फिल्म को बनाने में उन्होंने 22 साल तक गहन शोध किया। रंगभेद जैसे विषय समेत 65 फिल्में बना चुके अनंत बताते हैं कि 1987 में पहली बार उन्होंने मंडेला के बारे में फातिमा मीर की किताब में पढ़ा।

हॉलीवुड की कई कंपनियां मंडेला की आत्मकथा पर फिल्म बनाना चाहती थीं, पर अनंत गर्व से बताते हैं कि वे जब जेल में मंडेला से मिले, तो उन्होंने कहा तुम ये फिल्म बनाओ। अनंत बताते हैं कि जब फिल्म बननी शुरू हुई तो मदीबा का व्यवहार काफी सहयोगात्मक था। वे हर तीन-चार महीने में मंडेला से मिलते थे। अनंत ने अपने आईपॉड में मंडेला की कई वीडियो क्लिपिंग सहेज रखी हैं। उन्हें मंडेला की पूर्व पत्नी विन्नी, कैथरेडा, मंडेला की बेटी मकाजिव का भी पूरा सहयोग मिला।

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