DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

घिरते हुए मुशर्रफ

सारे पासे पलट गए। पूर्व फौजी तानाशाह परवेज मुशर्रफ अब पाकिस्तान से भाग नहीं पाएंगे। बीमारी के बहाने तो नहीं ही। उनकी मांग थी कि इलाज के लिए उन्हें विदेश जाने दिया जाए। मगर आर्मी डॉक्टरों की टीम ने अदालत को जो जांच-रिपोर्ट सौंपी है, उसमें यह साफ-साफ लिखा हुआ है कि मुशर्रफ को और इलाज की कोई जरूरत नहीं है। असल दिक्कत यह है कि इस पूर्व सदर को पाकिस्तानी इलाज पर भरोसा नहीं है। यहीं से उनकी अर्जी को खारिज करने का आसान और मुनासिब रास्ता निकला। और तमाम घटनाएं यह साबित करती हैं कि जनाब मुशर्रफ मुल्क के आईन को अपना काम करने से रोकने का इरादा रखते हैं। उनकी उम्र और मौजूदा हालत की बुनियाद पर यह मुमकिन है कि पूर्व सदर को इलाज की जरूरत हो, जो उन्हें विदेशी जमीन पर ही मिल सकती है।

ऐसे में, दूसरे मेडिकल जानकारों की आजाद टीम की जांच के बाद मुशर्रफ अपनी नई अर्जी दे सकते हैं, जिस पर अदालत को सुनवाई करनी चाहिए। तब तक मुनासिब यही है कि जनाब मुशर्रफ अदालत में पेश होते रहें, अपने ऊपर लगे इल्जामों का बचाव करें और अपनी किस्मत का फैसला अदालत पर छोड़ दें। यकीनी तौर पर ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जो यह बताए कि मियां मुशर्रफ के मुकदमे के सिलसिले में किसी कदर का समझौता हुआ है, या यह प्रोसेस पानी की तरह साफ नहीं है, या कायदे-कानून का बेजा इस्तेमाल हुआ है। मुशर्रफ के खिलाफ चल रही सुनवाई में उनके लिए मौके की सिर्फ एक खिड़की खुल सकती है। जैसे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से बातचीत की दूसरी कोशिश की बजाय वजीर-ए-आजम फौजी ऑपरेशन का ऐलान कर दें। ऐसे में, मुशर्रफ के खिलाफ जारी मुकदमे का सियासी तौर पर खात्मा हो सकता है, क्योंकि मुशर्रफ अपने ऊपर गद्दारी के इल्जाम को फौज से जोड़ देते हैं। हुकूमत के लिए यह मुश्किल होगा कि एक तरफ वह अपनी फौज की कुर्बानी दे और दूसरी तरफ, उसके पुराने आका पर देशद्रोह का मुकदमा चलाए। मगर यह साफ है कि मुशर्रफ की गिरफ्तारी वारंट जायज कदम है और उन्हें सात फरवरी को कोर्ट में जाना चाहिए।
द डॉन, पाकिस्तान

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:घिरते हुए मुशर्रफ