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घर के शेर बाहर ढेर

न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज हारकर यह साफ हो गया कि टीम इंडिया के खिलाड़ी घर के ही शेर हैं। कहां महेंद्र सिंह धौनी की सेना स्पिन, सीम और पिच में दक्ष मानी जा रही थी, लेकिन इन्हीं तीन मोर्चो पर वह बुरी तरह नाकाम रही। सिवाय विराट कोहली के किसी बल्लेबाज का बल्ला नहीं बोला और गेंदबाज तो फ्लॉप रहे ही। इस विदेशी सीरीज में यह भी लगा कि धौनी की कप्तानी अब धारदार नहीं रही है। वह मैदान पर सुस्त थे और कई गलत फैसले लेते नजर आए। आखिर स्पिनर अमित मिश्रा को मौका क्यों नहीं दिया गया? वह गुगली डालने में माहिर हैं। चयनकर्ताओं ने भी कई गलतियां कीं। दक्षिण अफ्रीका दौरे पर जो खिलाड़ी भरोसा नहीं जगा सके, उन्हें ही न्यूजीलैंड दौरे पर भेज दिया गया। टीम की भलाई के लिए कुछ अच्छे परिवर्तन जरूरी थे। अनुभवी गौतम गंभीर को वहां ले जाना चाहिए था। युवराज सिंह जैसे आक्रामक बल्लेबाज को न्यूजीलैंड नहीं लेना जाना भी एक गलत फैसला साबित हुआ। शिखर धवन तेज गेंद पर मात खाते नजर आए। उन्हें अपनी बैटिंग शैली सुधारनी होगी, वरना उन्हें विदेशी दौरों में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। यह भी सोचना होगा कि क्या विराट कोहली को कप्तानी का जिम्मा सौंपा जाए?
जगदीश लाल सलूजा, पीतमपुरा, दिल्ली

दिल्ली में दिखाएं दम

अरविंद केजरीवाल को अभी दिल्ली में अपनी स्थिति सुदृढ़ करनी चाहिए, क्योंकि दिल्ली की जनता ने बड़ी उम्मीदों के साथ उन्हें मौका दिया है। लेकिन ऐसा दिख रहा है कि वह और उनकी टीम लोकसभा की तैयारियों में जुट गई है। अच्छा होगा कि वह लोकसभा के लिए हाथ-पांव मारने का ज्यादा प्रयास न करें। अगर अरविंद केजरीवाल दिल्ली की जनता का दिल जीत लेते हैं, तभी उन्हें हिन्दुस्तान अपनाएगा। इसलिए समझदारी इसी में है कि वह दिल्ली की समस्याओं पर ध्यान दें। यहां की जनता से किए वायदों को पूरा करें। आम आदमी पार्टी की सरकार एक महीने की हो चुकी है, मगर इनके पास विशेष उपलब्धियां नहीं हैं। अगर दिल्ली की जनता निराश हो गई, तो आप कहीं की नहीं रहेगी।
विजय लक्ष्मी गौतम, सरस्वती विहार, दिल्ली-34

मेट्रो के बहाने

यह समझ से परे है कि दिल्ली की जान ‘मेट्रो’ को कई मौकों पर बाधित क्यों कर दिया जाता है? कभी राष्ट्रीय पर्व के नाम पर, तो कभी सुरक्षा-व्यवस्था की जरूरत बताकर कई-कई स्टेशन बंद कर दिए जाते हैं, जिससे दिल्लीवासियों को काफी दिक्कतें होती हैं। इसी तरह, अगर कहीं बड़ी रैली या धरना-प्रदर्शन है, तो उस जगह के आस-पास के मेट्रो स्टेशन भी बंद करने की घोषणा कर दी जाती है। यह भी गलत है। इससे जन-हिस्सेदारी घटती है और मांग की ताकत का अंदाजा नहीं लग पाता है। इसके अलावा, आम मुसाफिर को यात्रा में मुश्किलें आती हैं। दफ्तरों में कर्मचारियों की संख्या घट जाती है। मेट्रो सेवा को बाधित करना दरअसल दमनात्मक कार्रवाई है। इसलिए दिल्ली मेट्रो किन परिस्थितियों में बंद हो या नहीं हो, इस बारे में अब अदालत की तरफ से दिशा-निर्देश जारी होना चाहिए।
नरेंद्र कुमार जैन, सैदुलाजाब, नई दिल्ली-30

इलाके में असंतोष

गाजियाबाद की खोड़ा कॉलोनी के कुछ मोहल्ले बुरी तरह उपेक्षित हैं। यहां विकास कार्यक्रम न के बराबर चल रहे हैं। इन सबके मद्देनजर भारतीय मजदूर यूनियन के सदस्य गाजियाबाद के सांसद और भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह को कई पत्र लिखे, लेकिन अब तक उन्होंने कोई कदम नहीं उठाया है। जन-प्रतिनिधि का यह व्यवहार दुखद है। खोड़ा कॉलोनी के नरेश विहार के लोग तो नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। सांसद जी ने पिछले लोकसभा में जो आश्वासन दिया था, उस पर भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे लोगों में काफी असंतोष है। उम्मीद है कि सांसदजी इस तरफ ध्यान देंगे।
भारत भूषण शाही, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश 

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