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दूसरी छमाही की विकास दर रहेगी 4.5-5 फीसदी: सीआईआई

दूसरी छमाही की विकास दर रहेगी 4.5-5 फीसदी: सीआईआई

मौजूदा कारोबारी साल की दूसरी छमाही में देश की विकास दर 4.5-5 फीसदी रह सकती है। यह बात रविवार को भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने कही। परिसंघ ने दूसरी छमाही में विकास दर में तेजी की संभावना से इंकार करते हुए कहा कि मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के बीच किए गए सर्वेक्षण के मुताबिक दूसरी छमाही की विकास दर 4.5-5 फीसदी रहेगी।

मौजूदा कारोबारी साल की पहली छमाही में विकास दर 4.6 फीसदी थी। परिसंघ ने हालांकि कहा कि विकास दर 5-5.5 फीसदी के दायरे में रहने की बात कहने वाले लोगों का अनुपात तीसरी तिमाही के 13 फीसदी के मुकाबले चौथी तिमाही में 29 फीसदी दर्ज किया गया।

परिसंघ ने कहा कि इसका स्पष्ट मतलब है कि अर्थव्यवस्था ने पिछली तिमाही में निचला स्तर छू लिया है और अब यह विकास के रास्ते पर है, हालांकि इसमें अनिश्चितता बनी हुई है। सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक राजनीतिक अनिश्चितता सबसे बड़ी चिंता है।

परिसंघ के राष्ट्रीय परिषद की बैठक में किए गए सर्वेक्षण की रिपोर्ट के मुताबिक लंबित परियोजनाओं की मंजूरी में तेजी लाने के लिए सरकार को फास्ट ट्रैक परियोजनाओं की प्रारंभिक सीमा मौजूदा 1000 करोड़ रुपये से घटाकर आधी करनी चाहिए।

परिसंघ के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि उच्च खाद्य महंगाई, विकास को लेकर जारी अनिश्चितता और ऋण लेने की लागत बढ़ने के कारण उपभोक्ता मांग प्रभावित हुई है। महंगाई में कुछ नरमी आने के कारण अब समय आ गया है कि मौद्रिक नीति का झुकाव विकास को बढ़ावा देने की ओर हो। रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा तिमाही में निर्यात में धीमी गति से विकास होता रहेगा। अप्रैल-दिसंबर अवधि में देश का निर्यात 230.3 अरब डॉलर, आयात 340.3 अरब डॉलर और व्यापार घाटा 110 अरब डॉलर रहा।

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