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चयन पर सोचने से काफी दबाव बनता है: ओझा

चयन पर सोचने से काफी दबाव बनता है: ओझा

प्रज्ञान ओझा तीसरे विशेषज्ञ स्पिनर के तौर पर रविंद्र जडेजा के बाद आते हैं और उनको विदेशों में टेस्ट सीरीज में खेलने का मौका बहुत कम मिलता है लेकिन ओड़िशा में जन्मा यह हैदराबादी गेंदबाज अभी से हार मानने को तैयार नहीं है।

ओझा ने 22 टेस्ट में 100 विकेट चटकाए हैं और 24 टेस्ट में उनके 113 विकेट हैं। वह उप महाद्वीप के बाहर भारत के लिए खेलने के मौके का इंतजार कर रहे हैं। ओझा ने कहा कि मैं चयन प्रक्रिया के बारे में सोचने के बजाय अपना ध्यान अपने खेल पर लगाए रखता हूं। चयन मामले मेरे हाथ में नहीं हैं लेकिन मेरे हाथ में मेरा प्रदर्शन है। मेरा काम देश के लिए खेलना है और मुझे जो जिम्मेदारी दी गई है, उस पर ध्यान लगाना है।

उन्होंने कहा कि इस तरह के विचार आपके दिमाग को नकारात्मक चीजों से भर देते हैं जिसका असर आपके प्रदर्शन पर पड़ता है। इसलिए सकारात्मक बने रहना महत्वपूर्ण है और चयन मामले चयनकर्ताओं पर छोड़ना ठीक है। ओझा टीम में नहीं चुने जाने का दबाव खुद पर नहीं लाना चाहते।

ओझा ने कहा कि अगर मैं इन सबके बारे में (दक्षिण अफ्रीका में एक भी मैच नहीं मिला और न्यूजीलैंड दौरे का हिस्सा नहीं हूं) सोचना शुरू कर दूंगा तो मैं खुद पर निश्चित रूप से काफी दबाव डाल लूंगा। उन्होंने कहा कि मैं इस तरह की चीजों का असर अपने खेल पर नहीं डालना चाहता। मैं अपने मौके का इंतजार करूंगा और मुझे भरोसा है कि एक दिन मुझे यह मिलेगा। मैं नकारात्मक सोच पर ध्यान नहीं देना चाहता। उन्होंने कहा कि चयन के मामले ऐसे हैं जिसके बारे में आप सवाल नहीं कर सकते। मेरा काम है कि जब भी मुझे टीम की ओर से खेलने का मौका मिले, मैं अपना शानदार प्रदर्शन करूं।

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