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तेल कीमतें न थमीं तो धुल जाएंगे सुधार

भारत के वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने रविवार को चेतावनी दी कि तेल की ऊंची कीमतों से विश्व, खासकर भारत की आर्थिक उपलब्धियां नष्ट हो जाने का खतरा पैदा हो गया है। जेद्दा में अंतरराष्ट्रीय ऊरा सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा, ‘हमने अपने लिए जो लक्ष्य तय किए हैं उनपर भीषण संकट मंडरा रहा है।’ उन्होंने तेल उत्पादक देशों से मूल्य नियंत्रण प्रणाली अपनाने और सट्टा बाजार पर नियंत्रण करने को कहा। उन्होंने कहा, ‘जेद्दा में मेरी मौजूदगी मुद्रास्फीति की वैश्विक प्रकृति को दर्शाती है। हम मौजूदा कीमत से काम नहीं चला सकते, इसलिए जरूरत है कि तेल उत्पादक देश तेल बाजार को शांत करं।’ रविवार को कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के असर पर विचार-विमर्श करने जुटे विश्व नेताओं ने तेल उत्पादक राष्ट्र संगठन ‘ओपेक’ के देशों से तेल का उत्पादन बढ़ाने का आह्वान करते हुए वैकल्पित ईंधन खोजने पर बल दिया। हालांकि ओपेक के अध्यक्ष चाकिब खलीली ने उत्पादन बढाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि बाजार में संतुलन कायम है और तेल की बढ़ती कीमतों का तेल उत्पादन से सीधा संबंध नहीं है। खलीली ने कहा कि ओपेक देशों ने तेल उत्पादन को लेकर कोई विशेष बैठक करने का फैसला नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि उत्पादन पर निर्णय लेने के लिए उत्पादक देशों को सितंबर तक का इंतजार करना होगा। इधर सऊदी अरब की राजधानी में तेल उत्पादक और उपभोक्ता देशों की आपात बैठक में नेताओं ने उम्मीद जताई कि तेल की बढ़ती कीमतों से निपटने का कोई उपाय शीघ्र तलाश लिया जाएगा। बैठक में सऊदी अरब के तेल मंत्री अली अल नियामी ने बाकी वर्ष के लिए लाख बैरल तेल का अतिरिक्त उत्पादन करने पर सहमति जताई। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने कहा कि तेल की कीमतों से निपटने उत्पादक और उपभोक्ता देशों के हितों को सुरक्षित करने के लिए नई व्यवस्था होनी चाहिए।

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