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ईमानदारी से जांच हुई, तो नपेंगे कई स्वास्थ्य अधिकारी

रांची विशेष संवाददाता। प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए दवा खरीदने में 18 करोड़ रुपए के घपले की जांच नगिरानी ब्यूरो के जिम्मे है। अगर यह जांच ईमानदारी से हुई, तो एक दर्जन से अधिक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी नपेंगे। स्वास्थ्य विभाग के प्रारंभिक जांच में ही यह स्पष्ट किया गया है। राज्य के सभी जिलों के सिविल सर्जन और चिकित्सा पदाधिकारियों द्वारा सहयोग नहीं करने पर आलाधिकारी अपनी रिपोर्ट पूरी ढंग से नहीं दे पाए थे।

आपदा प्रबंधन से निपटने के लिए राज्य के सभी जिलों में दवा की खरीद की गई थी। इसके लिए नगद राशि की व्यवस्था सरकार स्तर से की गई। दवा की खरीद वैसे संस्थानों से करा ली गई, जो खुद बीमार है और दवा का उत्पादन नहीं करते।

सदर अस्पताल रांची में कर्नाटक एंटीबायोटिक एंड फार्मा लिमिटेड बेंगलुरु द्वारा मार्केटेड दवा की आपूर्ति भारी मात्रा में की गई। मेसर्स हिन्दुस्तान एंटीबायोटिक लिमिटेड पुणे से भी जिन दवाओं की खरीद बताई गई है, उसमें भी सवाल खड़ा किया गया है।

कई मामलों में तो बाजार भाव से ऊंचे मूल्यों पर खरीद दिखाई गई है। डोरंडा, कांके, अनगड़ा, बुंडू, मांडर, रामगढ़, बोकारो, साहेबगंज, चाईबासा, सरायकेला और जमशेदपुर में भारी गड़बड़ी है।

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