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शिक्षा विभाग की बहाली में मंत्री व अधिकारियों का अड़ंगा

धनबाद/ वरीय संवाददाता। झारखंड का मानव संसाधन विकास विभाग एक बार फिर चर्चा में है। बात चाहे प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति की हो या विश्वविद्यालय के कुलपति व प्रतिकुलपति (प्रो वीसी) समेत अन्य की।

शिक्षा विभाग की बहाली में शायद ही कोई ऐसा पद है, जिसमें अड़ंगा नहीं लगा हो। विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग में सात महीने से कुलपति व प्रतिकुलपति समेत अन्य पद खाली हैं। छात्रों व शिक्षकों की समस्याओं का अंबार लगा है। 25 जनवरी को सर्च कमेटी ने 66 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए रांची बुलाया।

सबको लगा कि तीन-चार फरवरी तक कुलपति की घोषणा हो जाएगी। पैनल भी तैयार कर लिया गया। इसी बीच सूबे की शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव ने कहा कि कुलपति नियुक्ति में विद्वानों की उपेक्षा हो रही है।

शिक्षा मंत्री के इस बयान ने नियुक्ति में पेंच फंस गया है। फरवरी में घोषणा नहीं हुई तो ..शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट कहा कि कुलपति के चार पदों के लिए किसी भी अनुसूचित जाति अथवा जनजाति के उम्मीदवारों को शामिल नहीं किया गया। डॉ. रवीन्द्र नाथ भगत, डॉ. दिवाकर मिंज, डॉ. विक्टर एक्का, प्रमोदिनी हांसदा को भी नहीं बुलाया गया।

झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम में कुलपति नियुक्ति में सर्च कमेटी का कोई प्रावधान नहीं है। शिक्षा मंत्री के इस बयान के बाद जिले के कॉलेजों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि हाल के दिनों में कुलपति व प्रतिकुलपति शायद ही मिले।

अगर 26 फरवरी के पहले नियुक्ति की घोषणा नहीं हुई तो क्या होगा। फरवरी के अंतिम सप्ताह में लोकसभा चुनाव को लेकर आचार संहिता लागू होने की पूरी संभावना है। शिक्षक हों या छात्र, सभी सरकार को कोस रहे हैं।

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