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सर्वे को ले मुख्यमंत्री ने साधा केन्द्र पर निशाना

पटना। हिन्दुस्तान ब्यूरो। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आर्थिक, सामाजिक और जातीय सर्वेक्षण को लेकर केन्द्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उसके तौर तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि सही आंकड़े और तथ्य दर्ज हुए या नहीं इसकी जांच के लिए लोगों को एक पावती रसीद देना चाहिए था। मगर केन्द्र ने उनका सुझाव नहीं माना।

यदि ऐसा होता तो कुछ खर्च भले बढ़ता मगर जानकारी सटीक रहती। कमियां लगे हाथ दूर हो जातीं। इसलिए जब यह काम हो, तो हमें सचेत रहना होगा, ताकि आंकड़े सही हों और सही लोगों को उसका लाभ मिल सके। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव अमृतलाल मीणा से कहा कि इस बाबत सारी जानकारी वह सार्वजिक करें। पारदर्शिता का जमाना है।

हर जानकारी को पब्लिक डोमेन में लाना चाहिए। लीकेज रोकने के लिए हर स्तर पर सतर्कता बरती जाए और खाद्य सुरक्षा आयोग में अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधि को भी शामिल किया जाना चाहिए।

अब जब केन्द्र ने छूट दी है तो हम अपने हिसाब से राज्य में आयोग के लिए नियम बनाएंगे। इससे लाभान्वित होने वालों में हर सात में पांच ग्रामीण अंचल के लोगों को शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की कोशिशों से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 से बिहार को सबसे अधिक लाभ हुआ है।

ग्रामीण क्षेत्र में 85.12 प्रतिशत एवं शहरी क्षेत्र में 74..53 प्रतिशत जनसंख्या को इसका लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेव पोर्टल आधारित सप्लाई चेन मैनेजमेंट का भी लोगों को लाभ होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र द्वारा कराए गए सर्वे में डाटा आपरेटरों के भुगतान के लिए राज्य सरकार को पंचायती करनी पड़ी। कई बाधाएं रहती हैं। दिशानिर्देश उनका (केन्द्र) और सर्वे होता है यहां। अब शब्दों को ही लीजिए। हम प्रायरिटी के लिए प्राथमिकता लिखते हैं।

वे (केन्द्र) पुर्वीक्ता चला रहे हैं। केन्द्र के सर्वे से पुर्वीक्ता के आधार पर परिवारों का चयन होना है। साफ्टवेयर से जब यह निकाला गया तो 40 लाख शिकायतें आईं। उनका निवारण किया जा रहा है।

जैसे-जैसे ऐसे परिवारों का पता चलेगा इसी माह से उनका राशन कार्ड बनना शुरू हो जाएगा। कोई छूटेगा नहीं सभी ‘पुर्वीक्ता’ परिवार को इसका लाभ जरूर मिलेगा। उन्होंने राज्य के 1.40 करोड़ की जगह केन्द्र द्वारा मात्र 65 लाख बीपीएल परिवारों की गणना किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसीलिए उन्होंने बिहार में अपनी खाद्य सुरक्षा योजना लागू की। ताकि सभी सुपात्र को इसका लाभ पहुंच सके। उन्होंने कहा कि हालांकि खाद्य सुरक्षा योजना के तहत लोगों को जरूरत का पूरा अनाज नहीं मिल सकेगा।

फिर भी औसत पांच व्यक्ति के परिवार के लिए 25 किलो अनाज मिलना अच्छी मदद होगी। इस पर बचने वाली राशि से वे अपने खाने में अन्य पोषक तत्वों को शामिल कर सकते हैं।

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