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निशाना साधने में बाजी मार गए डीजीपी

पटना। हिन्दुस्तान ब्यूरो। टारगेट सामने और हाथ में कारबाइन, अचानक गोलियों की बौछार। ट्रिगर से उंगलियां हटते ही तालियों की गड़गड़ाहट शुरू हो गई। हो भी क्यों नहीं, आखिर बिहार पुलिस के वरीय अधिकारियों ने अपने टारगेट को लगभग भेद दिया।

कुहासे से भरी शनिवार की सुबह निशानेबाजी प्रतियोगिता में हाथ आजमाने उतरे पुलिस अधिकारी व जवान भी उत्साह में थे। हर कोई निशाना लगाने को उतारू था, लेकिन गोलियां चलाने के बाद कई अधिकारी हाथ मलते रह गए। बीएमपी-5 में शनिवार को शॉर्ट रेंज फायरिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई।

डीजीपी अभयानंद और एडीजी बीएमपी गुप्तेश्वर पाण्डेय भी पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने कारबाइन से निशाना साधा। पहली बार में सामने मौजूद टरगेट पर पांच-पांच गोलियां चलायीं। इसमें एक अंक से एडीजी आगे रहे।

अगली बार एक जगह से आठ टारगेट को भेदना था। पहले डीजीपी ने आठ गोलियां चलाईं। सभी टरगेट पर लगे और उन्होंने महज नौ सेकेंड का समय लिया। एडीजी, बीएमपी ने भी सभी टारगेट को भेदा पर उन्हें तेइस सेकेंड का वक्त लगा।

स्कोर के लिहाज से दोनों अधिकारी बराबरी पर रहे, लेकिन वक्त के मामले में डीजीपी ने बाजी मार ली। दोनों अधिकारी खुद प्रतियोगिता में शामिल नहीं थे पर पुलिसकर्मियों का उत्साह बढ़ाने के लिए पहुंचे थे। एडीजी लॉ एंड ऑडर एसके भारद्वाज और आईजी सीआईडी विनय कुमार ने भी निशानेबाजी में हाथ आजमाया।

दोनों टारगेट को भेदने में कामयाब रहे। बीएमपी के तमाम कमांडेंटों ने भी फायरिंग की। इसमें क्षत्रनील सिंह पहले स्थान पर रहे। बाकी के कमांडेंट कुछ खास जलवा नहीं दिखा पाए। फायरिंग प्रतियोगिता 3 फरवरी तक चलेगी। इसमें लांग रेंज हथियारों से बीएमपी डेहरी में फायरिंग होगी।

पुरस्कार वितरण समारोह 5 फरवरी को बीएमपी-5 में होगा। पूर्व आईजी के नाम पर प्रतियोगिता शूटिंग प्रतियोगिता बिहार के पूर्व आईजी पुलिस एसएन अखौरी के नाम पर होती है। कई वर्षो से प्रतियोगिता हो रही है।

पर बीच में यह बंद हो गई थी। वर्ष 2008 में इसे दोबारा शुरू किया गया। बीएमपी की तमाम बटालियन इसमें भाग लेती है। अब जिला पुलिस बल को भी जोन वाइज शामिल करने की तैयारी है।

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