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भभुआ : मुखिया व ठेकेदारों ने हथियाए जॉबकार्ड

गांवों की सूरत बदलने के लिए चलाई जा रही योजनाओं के सुखद परिणाम नहीं दिख रहे हैं। चैनपुर प्रखंड में यह आम शिकायत है कि कुछ मुखियों और ठेकेदारों द्वारा जॉब कार्ड अपने पास रख लिया गया है। फलत: कार्डधारी मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है। एपीएल और बीपीएल सूची में नाम नहीं जोड़े जाने को लेकर जिले में जब हंगामा मचा तो अधिकारियों ने वंचित लोगों का नाम सूची में जोड़ने का आदेश दे दिया।ड्ढr ड्ढr पंचायतीराज में शैक्षणिक व शारीरिक विकास के लिए पुस्तकालय और खेल मैदान का प्रबंध किया जाना है। लेकिन, जिले के किसी भी पंचायत में इसकी व्यवस्था नहीं की जा सकी है, जिससे गांव की प्रतिभाएं कुंठित होने लगी हैं। डीडीसी नवीन चंद्र झा भी इस बात को स्वीकारते हैं कि गांवों में पुस्तकालय और खेल मैदान का प्रबंध पंचायतों द्वारा नहीं किया जा सका है। गांवों में रहने वाले दलितों व आदिवासियों के हालात में भी कोई खास परिवर्तन देखने को नहीं मिल रहा है।ड्ढr रामपुर प्रखंड के सबार के तिरपन सिंह कहते हैं कि उनके गांव की गलियां ऐसी हैं कि बारिश होने पर गुजरना मुश्किल हो जाता है। भगवानपुर प्रखंड के ओरगाईं के कमलेश पांडेय का कहना है कि पंचायतीराज में विकास का नजारा यह है कि बारिश होने पर गांवों में जाने के लिए घुटने भर पानी से गुजरना पड़ता है।ड्ढr ड्ढr चांद के बटेश्वर पाण्डेय, परमानंद सिंह कहते हैं कि जाम पुलिया की सफाई नहीं कराने से खेतों का पटवन नहीं हो रहा है। अधौरा के बालजीत उरांव ने कहा कि पंचायती राज में भी प्रखंड के 105 गांव बिजली से वंचित है। अधिकारियों से गांवों के विकास के बार में पूछने पर वे आंकड़ों के फरब में फंसाने का प्रयास करते हैं। लेकिन, सच यह है कि गांवों का विकास अपेक्षित नहीं हो रहा है। हालांकि डीडीसी कहते हैं कि जिले में विकास दर बढ़ी है। लेकिन, जिला परिषद अध्यक्ष प्रमोद सिंह का कहना है कि विकास की फाइलें इांीनियरों के टेबुल के इर्द-गिर्द घूमती रहती हैं।ड्ढr इतनी समस्याओं के बाद भी पंचायत के प्रतिनिधि विकास के प्रति चिंतित नहीं दिखते। बेगूसराय : लूट संस्कृति हावी कई मुखिया जांच के घेर मेंड्ढr विपिन कुमार बेगूसराय लूट की संस्कृति के पनपने के कारण कई पंचायतों में पटरी से उतर गयी है विकास की गाड़ी। जिले के दर्जनों मुखिया जांच के घेर में हैं। कई को पद से हटाने की अनुशंसा भी डीएम ने की है बावजूद इसके हालात में सुधार होता नजर नहीं आ रहा है। बलिया एसडीओ गोरखनाथ कहते हैं कि गरीबों की हकमारी व सरकारी राशि का दुरूपयोग करने वालों को सजा नहीं मिलने पर स्थिति में सुधार नहीं होगा।ड्ढr कुछ पंचायतों में महा सोलर लाइट, चापाकल व सड़क पर मिट्टीकरण व ईंट सोलिंग के कार्य ही हुए। एकादश वित्त आयोग की राशि वापस लौटा ली गई और उसी राशि को द्वादश वित्त आयोग की राशि में कन्वर्ट कर पंचायतों को दी गई। इसके अलावे पिछड़ा क्षेत्र विकास निधि व नरगा की राशि पंचायतों को मिली है पर अबतक कई पंचायतों में कोई काम नहीं हुआ। मुखिया समर्थक व विरोधियों के खेमों में बंटे लोगों के कारण पंचायतों का न तो अपेक्षित विकास हो रहा है और न ही आम लोगों में पंचायती राज के प्रति भरोसा ही जग रहा है।ड्ढr आमसभा का नहीं होना, योजनाओं के चयन में मुखिया की मनमानी व राशि की बंदरबांट के अलावा शिक्षक व आंगनबाड़ी सेविका सहायिका चयन में गड़बड़ी की शिकायतें अमूमन सभी पंचायतों की है। कई पंचायतों में तो मुखिया समर्थक व विरोधियों के बीच टकराव की स्थिति बनी है। विकास समेत अन्य मुद्दे वहां गौण हो गए हैं। मुखिया समर्थक व मुखिया विरोधी खेमों में बंटे पंचायतवासियों में समर्थन व विरोध को लेकर लूट की संस्कृति पनपती जा रही है। इस स्थिति का असर न केवल पंचायतों के विकास पर बल्कि पंचायती राज की सेहत पर भी पड़ना तय है जो भविष्य के लिए घातक सिद्ध होगा। कटिहार : काम से वंचित मजदूरों का हो रहा पलायनड्ढr ओमप्रकाश अम्बुज कटिहार राज्य सरकार द्वारा पंचायतों को दिए गए अधिकार व महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त होने के बाद विकास की गति तेज हुई है। हालांकि, मजदूरों के पलायन पर अब तक विराम नहीं लग पाया है। जिले के 237 मुखियों में महिला मुखिया की संख्या 120 है। पंचायतों के माध्यम से नरगा की 50 प्रतिशत राशि से सड़क, तालाब, पुल-पुलिया का निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया है। प्रत्येक प्रखंड में नरगा के कार्यक्रम पदाधिकारी की नियुक्ित एवं पदस्थापन किए जाने से विकास कार्य जारी है।ड्ढr ड्ढr पंचायती राज व्यवस्था लागू होने के सात वषों के बाद भी पंचायतों को पूर्ण अधिकार प्राप्त नहीं हो सका है। उत्तरी मुरादपुर पंचायत के मुखिया लाल बहादुर मंडल ने बताया कि सरकार के निर्देश के बावजूद अभी तक अंशत: अधिकार दिए गए हैं। प्रतिनिधियों को अधिकार नहीं मिलने से उनमें आक्रोश पनप रहा है। राज्य सरकार द्वारा महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के बाद महिला प्रतिनिधियों को चूल्हा-चौकाघर से बाहर निकालने का प्रयास किया गया। अभी भी महिला प्रतिनिधि अपने पति की बैसाखी का सहारा ले रही हैं। बैठकों में उनके पति तो नहीं जाते हैं। लेकिन सारे कार्य मुखिया पति द्वारा संपादित कराए जाते हैं। वर्ष 2001 में संपन्न त्रिस्तरीय पंचातय चुनाव के बाद जनप्रतिनिधियों की कार्य संस्कृति में बदलाव आया है।ड्ढr कुरसेला प्रखंड अंतर्गत पश्चिमी मुरादपुर एवं उत्तरी मुरादपुर पंचायत में आजादी के 6 दशक बाद काफी बदलाव आया है। ग्रामीणों की सेवा में भी तत्परता आई है। जिला पंचायती राज पदाधिकारी मथुरा बड़ाइक ने बताया कि पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण की आवश्यकता है। राज्य सरकार द्वारा जो अधिकार दिए गए हैं, उनका दुरुपयोग किया जा रहा है।ड्ढr महिला मुखिया किरण देवी, अनामिका देवी एवं कल्पना देवी का मानना है कि देश की आधी आबादी को जो सम्मान मिला, उससे महिलाएं पुरुषों के समान आगे बढ़ने को तत्पर हैं।

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