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फीस बढ़ाने के लिए छात्रों की संख्या कम दिखाते हैं

नई दिल्ली। वरिष्ठ संवाददाता। फीस बढ़ोतरी के लिए मजबूत आधार बनाने के लिए राजधानी के निजी स्कूल सरकार के समक्ष छात्रों की संख्या कम दिखाते हैं। इसका खुलासा स्कूलों द्वारा दिल्ली सरकार के समक्ष दाखिल वार्षिक रिटर्न से हुआ है। इतना ही नहीं, कुछ स्कूलों ने सरकार के समक्ष पूरी कक्षा को ही अपने दस्तावेजों में जिक्र नहीं किया है। सूचना अधिकार कानून के तहत स्कूलों के वार्षिक र्टिन हलफनामे में छात्रों की संख्या और कक्षा को लेकर अलग-अलग जानकारी दी गई है।

हाईकोर्ट ने कथित तौर पर जारी फर्जीवाड़े को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली सरकार से उचित कार्रवाई करने का आदेश दिया है। जस्टिस बी. डी. अहमद और सिद्धार्थ मृदुल की पीठ ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचवि को ऐसे स्कूलों के खिलाफ अपराधिक मुकदमा दर्ज कराने के बारे में निर्णय लेने का निर्देश दिया है। पीठ ने मुख्य सचवि से स्कूलों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग को लेकर अधविक्ता खगेश झा द्वारा भेजे गए प्रतविेदन पर आठ सप्ताह में निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

हाईकोर्ट ने अधविक्ता खगेश द्वारा दाखिल याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश दिया है। उन्होंने सूचना अधिकार के तहत मिले दर्जनों स्कूलों के वार्षिक र्टिन और प्रिंसिपल द्वारा शिक्षा निदेशालय के समक्ष दाखिले की मंजूरी के लिए पेश हलफनामा का हवाला देते हुए स्कूलों पर करोड़ो रुपये के घोटाले का आरोप लगाया। उन्होंने ऐसे स्कूलों पर अपराधिक मुकदमा चलाने की मांग करते हुए कहा कि स्कूल बच्चों की संख्या कम दिखा कर फीस बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ स्कूल तो पूरी कक्षा के बारे में ही सरकार को जानकारी नहीं देते हैं और इन कक्षा से मिले पैसे को काले धन के रूप में जमा करते है।

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