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किसानों को दी जैविक खाद की जानकारी

चकिया। हिन्दुस्तान संवाद। आधुनिकता के दौड़ में किसान रासायनिक खादों का प्रयोग कम करें। अधिक मात्रा में प्रयोग करने से इसका सीधा प्रभाव स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसलिए अधिक से अधिक जैविक खादों का प्रयोग करें। उक्त बातें काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी के कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रोफेसर आरपी सिंह ने शनिवार को वन वशि्रामगृह में कृषि विज्ञान संस्थान द्वारा आयोजित जैव संसाधन विषयक किसान गोष्ठी में किसानों को प्रशिक्षण के दौरान कहीं।

उन्होंने कहा कि जैव संसाधन विकास मुख्य रूप से संपोषणीय कृषि व्यवसाय का अभिन्न अंग है। ऐसे में तत्काल बनाई गई जैवकीटनाशी व जैव उर्वरक आदि को जैव संसाधन केंद्रों द्वारा किसानों को उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किया जाएगा। प्रोफेसर एचबी सिंह ने कहा कि किसान प्रशिक्षण पाकर गोबर की सहायता से ट्राईकोडर्मा बना सकते हैं। उन्होंने बताया कि जैव संसाधन केंद्र राष्ट्रीय विकास योजना भारत सरकार द्वारा स्थापित किए जाने हैं। जिसमें चंदौली, जौनपुर, मिर्जापुर व प्रतापगढ़ जिलों में स्थापित होगा।

जिसके तहत चंदौली के चकिया में जल्द जैव संसाधन केंद्र खोलने की प्रक्रिया आरंभ होगी। उपजिलाधिकारी रामआसरे सिंह ने कहा कि कंपनियों पर निर्भरता खत्म कर इन विधियों का प्रयोग करके स्वयं जैविक कीटनाशक दवाएं बनाएं। तत्पश्चात कृषि वैज्ञानिक जेपी शाही, डॉ. पीके सिंह, डॉ. बी. शर्मा, प्रोफेसर डी. सिंह, डॉ. रामकेवल ने किसानों को जैविक संसाधन के बारे में जनकारी दी। किसान गोष्ठी में संतराम पांडेय, बच्चान सिंह, पंकज सिंह, गौरव श्रीवास्तव, अलियार सिंह, हरवंश सोनकर, प्यारे सोनकर, कपिल देव, वीरेन्द्र सिंह, नंदलाल मौर्या, रवशिंकर शुक्ला आदि उपस्थित रहे।

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