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शहर को जल्द मिलेगी रेडियो टैक्सी

गोरखपुर। निज संवाददाता। नए रंग, रूप व बेहतर प्रबंधन से युक्त वातानुकूलित आरामदायक रेडियो टैक्सी की सुविधा शहरवासियों को जल्द ही मिलेगी। सामान्यतया यह सेवा नगर के भीतर ही आवागमन के लिए उपलब्ध होगी, लेकिन यात्री की मांग पर वह नगर निगम सीमा के बाहर स्थित पर्यटन स्थल पर भी जाएगी।

एक फोन पर मनचाही जगह पर आ जाने वाली जीपीएस (ग्लोबल पोजशिनिंग सिस्टम) प्रणाली पर आधारित इस सेवा को शुरू कराने के लिए परवहिन विभाग ने पहल तेज कर दी है। इसके लिए विभाग ने दस बड़े ट्रांसपोर्टरों से सम्पर्क किया है। सितंबर 2013 में प्रदेश सरकार ने 13 नगर निगमों में रेडिया टैक्सी सेवा शुरू करने का निर्णय लिया है। इसमें लखनऊ, कानपुर, आगरा, इलाहाबाद, वाराणसी, झांसी, अलीगढ़, गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली व गोरखपुर भी शामिल था। गाजियाबाद व लखनऊ में सेवा प्रारम्भ भी हो चुकी है।

योजना के अगले चरण में इसे गोरखपुर में शुरू होना है।

क्या है रेडियो टैक्सीरेडियो फ्रिक्वेंसी से जुड़े होने के साथ ही अन्य कई विशेषताओं के कारण इसे रेडियो टैक्सी का नाम दिया गया है। वाहन इनोवा जैसा होगा, जो जीपीएस/जीपीआरएस तकनीक से लैस होगा। इससे वाहन की पोजीशन 24 घण्टे कण्ट्रोल रूम के पास उपलब्ध रहेगी। पुलिस द्वारा सत्यापित व प्रशिक्षित लोग ही इसके चालक होंगे। यात्रियों की सुविधा के लिए चालक की फोटो सहित उसकी पूरी जानकारी और संचालक कम्पनी का वविरण डैशबोर्ड पर प्रदर्शित किया जाएगा।

सप्ताह के सातों दिन 24 घण्टे उपलब्ध रहने वाली सेवा एलपीजी/सीएनजी से संचालित होगी। वाहन की छत में एलईडी/एलसीडी डिस्प्ले बोर्ड, प्राथमिक उपचार पेटिका, जीपीएस/जीपीआरएस ट्रैकिंग उपकरण एवं संचालक के नियंत्रण कक्ष एवं चालक के मध्य सम्पर्क के लिए मोबाइल रेडियो होगा।

कौन ट्रांसपोर्टर होंगे पात्ररेडियो टैक्सी परमिट के लिए एकल व्यक्ति, व्यक्तियों का समूह, कोई कम्पनी या सोसायटी भी आवेदन कर सकती है। संचालक के पास कम से कम दस वाहन जरूर होने चाहिए। इसके कण्ट्रोल के लिए कार्यालय परिसर अलग से होगा, जहां यात्रियों के लिए दिन-रात काम करने वाली दो टेलीफोन लाइनें व संचार उपकरण होंगे।

प्रत्येक परमिट के लिए आवेदन शुल्क 500 व परमिट शुल्क 1000 व कोर्ट फीस 200 रुपए होगी।

-रेडिया टैक्सी सेवा शुरू करने के लिए शहर के दस बड़े ट्रांसपोर्टरों को 31 जनवरी को बुलाया गया था। कम से कम दस टैक्सियों के बेड़े वाले आौर पर्याप्त पार्किंग स्थल रखने वाले को प्राथमिकता दी जाएगी। जितनी जल्दी कोई ट्रांसपोर्टर तैयार होगा वैसे ही इसे प्रारम्भ कराया जाएगा। इसका किराया शासन निर्धारित करेगा। अनिल कुमार गुप्ता, आरटीओ प्रवर्तन।

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