DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

एक पहल बदल देगी दुनिया

मिस यूनिवर्स रह चुकी बॉलीवुड अदाकारा सुष्मिता सेन को शुरुआत से ही सामाजिक कार्यों में दिलचस्पी रही है। 19 साल की उम्र में उन्हें दुनिया की सबसे खूबसूरत महिला होने का खिताब मिला और 25 साल की उम्र में उन्होंने तीन महीने की एक बच्ची को गोद ले लिया। पेश हैं मुंबई में दिए गए उनके एक भाषण के अंश:

नेक मकसद
आपको गर्व के साथ बताना चाहती हूं कि मैं दो बहुत ही प्यारी बेटियों की मां हूं। यह बहुत ही खूबसूरत शाम है। ये मेरे जीवन का बहुत ही प्यारा और भावुक लमहा है। इस समारोह में मेरी दोनों बेटियां और मां भी मौजूद हैं। मैं ईश्वर पर बहुत यकीन करती हूं। मैं मानती हूं कि इस दुनिया में जो कुछ भी होता है, किसी मकसद से होता है। आज हम सब यहां एक नेक मकसद से एकत्र  हुए हैं, यह सब ईश्वर की मर्जी से हो रहा है। हमारा मकसद है जागरूकता फैलाना। मैं मानती हूं किसी भी मुद्दे को हल करने के लिए लोगों का जागरूक होना बेहद जरूरी है। इसलिए मैं उन सभी महिलाओं को तहेदिल से शुक्रिया कहना चाहती हूं, जिन्होंने हम सबको यहां बुलाया, ताकि हम जान सकें कि हमारे आस-पास क्या हो रहा है और हमें क्या करने की जरूरत है।

मेरा परिवार
मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानती हूं कि मेरा जन्म एक अच्छे परिवार में हुआ। मेरे माता-पिता ने मुझे बहुत प्यार से पाला। उन्होंने कभी अपने बेटे और बेटी में भेद नहीं किया। उन्होंने बेटी होने के नाम पर कभी मेरी हसरतों को नहीं दबाया। उन्होंने मुझे अच्छे संस्कार दिए, ताकि मैं एक अच्छी इंसान बन सकूं। आज मैं इस मौके पर आप सबके सामने अपने मम्मी और डैडी को मुझे एक बेहतर जिंदगी देने के लिए धन्यवाद कहना चाहती हूं।

डरावने आंकड़े
मुझे अपने घर में इतना प्यार-दुलार मिला कि मुझे कभी एहसास ही नहीं हुआ कि देश के दूरदराज के इलाकों व छोटे शहरों में रहने वाली लड़कियों के साथ किस तरह का भेदभाव होता है। बड़े होने पर मुझे पता चला कि लड़कियां कैसे पूरी जिंदगी क्रूरता सहती हैं। लेकिन आज हम महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों और उनसे संबंधित आंकड़ों पर बहस नहीं करेंगे। मैं यह नहीं बताना चाहती कि हमारे देश में हर पल कितनी लड़कियों का यौन शोषण होता है या फिर हर दिन कितनी महिलाओं की हत्या होती है। ये आंकड़े बहुत डरावने हैं। इन्हें जानकर निराशा होती है, दिल को बुरा लगता है। हमने महिला समस्या पर बहुत बात की है, तमाम बार दुख जताया है। पर आज हम ऐसा कुछ नहीं करेंगे। आइए, आज हम सिर्फ समाधान की बात करें। हम सब मिलकर यह सोचें कि कैसे इन घटनाओं को रोका जाए? हम सब मिलकर तय करें कि हम अपनी बेटियों को एक बेहतर जिंदगी देंगे।

मदर टेरेसा की याद
आज मुझे मदर टेरेसा की याद आ रही है। उनकी मौत के एक साल पहले मैं उनसे मिली थी। तब मैं 18 साल की थी। यह मुलाकात कोलकाता में हुई थी। मुझे आज भी वह दिन याद है। सच कहूं, तो उस मुलाकात ने मेरे जीवन की दिशा ही बदल दी। मैंने ‘मदर’ के साथ उनके ‘हाउस’ का दौरा किया। मैं वहां रह रहे अनाथ बच्चों से मिली। शायद उस समय वहां करीब 55 बच्चे थे। मुझे उन बच्चों से मिलकर बहुत अच्छा लगा। पर मेरे मन में काफी देर से एक सवाल चल रहा था। आश्रम का दौरा करने के बाद मैंने मदर से कहा, मदर, मैंने यहां बहुत सारे बच्चे देखे, पर वे सभी लड़कियां हैं। एक भी लड़का नहीं है। क्या यहां लड़के नहीं रहते या फिर आपने लड़कों के लिए अगल से कोई ‘हाउस’ बनाया है? मदर मुस्कराने लगीं। उन्होंने कहा- नहीं, ऐसी बात नहीं है। यह घर सबके लिए है। पहले हमारे पास चार लड़के थे, पर उन सभी को गोद ले लिया गया। जाहिर है, वह मेरे अगले सवाल को समझ चुकी थीं। मैं उनसे पूछना चाहती थी कि लोग लड़कियों को गोद क्यों नहीं लेते? मदर ने मुझे समझाते हुए कहा, ये लड़कियां भाग्यशाली हैं। इन लड़कियों के लिए ईश्वर ने जरूर ही दूसरा कोई प्यारा-सा घर तलाश रखा होगा, एक ऐसा घर, जहां इन लड़कियों को बहुत सारा प्यार मिलेगा।

प्रकृति का नियम
दोस्तो, प्रकृति के अपने नियम-कायदे हैं। प्रकृति इंसानों में भेद नहीं करती। लड़के और लड़की का जन्म समान तरह से ही होता है। भेदभाव तो जन्म के बाद शुरू होता है। प्रकृति ने कितना अच्छा नियम बनाया है। जब बच्चा गर्भ में होता है, तो मां को भी पता नहीं होता कि बेटा होने वाला है या बेटी। ईश्वर नहीं चाहता कि हमें जन्म के पहले बच्चे के लिंग का पता चले। हमें यह जानने का कोई हक नहीं है। प्रकृति ने यह नियम इसलिए बनाया, ताकि समाज में हमेशा संतुलन बना रहे। पर हम इंसान प्रकृति के इस नियम को नजरअंदाज करते हैं। अगर हमने बेटियों को उपेक्षित करना बंद नहीं किया, तो हमें इसका बहुत खामियाजा भुगतना होगा।

सिंगल मदर
मदर टेरेसा से मिलने के बाद मैंने एक फैसला किया। मैंने तय किया कि मैं एक बेटी की मां बनूंगी। दोस्तो, जब भी मैं इस विषय पर बात करती हूं, तो बहुत भावुक हो जाती हूं। यह बात मेरे दिल के बहुत करीब है। जब लोग दुनिया बदलने की बात करते हैं, तो मैं कहती हूं कि दुनिया की चिंता मत करो। बस यह सोचो कि आप क्या कर सकते हैं? आप बस एक इंसान के जीवन को बदलने की बात करो, बाकी सब अपने आप ठीक हो जाएगा। मैं अपने देश और समाज का शुक्रिया अदा करना चाहती हूं, जिन्होंने मुझे सिंगल मदर बनने का साहस दिया। आपके सहयोग ने मुझे इतना आत्मविश्वास दिया कि मैं दो बेटियों को गोद लेने और उनके पालन-पोषण की जिम्मेदारी उठा सकी। मैं अपनी दोनों बेटियों- एलिसा और रेने के साथ बहुत खुश हूं। उम्मीद करती हूं कि आप यहां से कुछ प्रेरणा लेकर जाएंगे और किसी एक इंसान का जीवन जरूर बदलेंगे।
प्रस्तुति: मीना त्रिवेदी

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:एक पहल बदल देगी दुनिया