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अच्छी नींद है अवसाद से बचाव की कुंजी

अच्छी नींद है अवसाद से बचाव की कुंजी

अपने आप को नींद से वंचित मत रखना, उम्र बढ़ने पर आप में बड़े अवसाद का कारण बन सकता है और मनोदशा विकार आप पर हमला कर सकते हैं।

वयस्क जुड़वां लोगों के एक आनुवांशिक अध्ययन और किशोरों के एक समुदाय पर आधारित अध्ययन में सोने की अवधि और अवसाद के बीच अनोखा संबंध पाया गया।

नींद की कम अवधि और ज्यादा अवधि, दोनों ही अवसादी लक्षणों से संबंधित जीनों को सक्रिय करते हैं।

यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन मेडिसिन स्लीप सेंटर, सीएटल के सह निदेशक और न्यूरोलॉजी के सहायक प्रोफेसर नथानिएट वाट्सऑन ने बताया, ''हम हैरान थे कि बहुत कम समय सोने वाले जुडवां लोगों में आवसादी लक्षणों की अनुवांशिकता, सामान्य नींद लेने वाले जुड़वा लोगों की अनुवांशिकता से दो गुनी थी।''

अमेरिकन अकेड़मी ऑफ स्लीप मेडिसिन के अध्यक्ष सेफवन ब्रेड ने कहा यह नया शोध दर्शाता है कि हम अपनी नींद को प्राथमिकता देकर अपने स्वास्थ्य में एक निवेश कर सकते हैं।

शोध के परिणाम बताते हैं कि सामान्य से ज्यादा नींद लेने से भी अवसाद के लक्षणों का खतरा हो सकता है।

जुड़वा बच्चों हर रात 8-9 घंटे की सामान्य नींद के साथ अवसादी लक्षणों की अनुवांशिकता 27 प्रतिशत थी। जबकि हर रात पांच घंटों की नींद लेने वाले जुड़वा लोगों में अवासादी लक्षणों पर आनुवांशिक प्रभाव 53 प्रतिशत और 10 घंटों की नींद लेने वालों में यह प्रभाव 49 प्रतिशत था।

11 से 17 साल के 4,175 लोगों के  एक और अध्ययन में पाया गया  किशोरों में कम नींद और अवसाद का पारस्परिक प्रभाव देखा गया।

अध्ययन में कहा गया कि छह या इससे कम घंटों की नींद बड़े अवसाद का खतरा बढ़ाती है।

'स्लीप' शोधपत्र में प्रकाशित अध्ययनों में बताया गया कि नींद में सुधार करके अवसाद की मनोचिकित्सा की प्रभावशीलता को बढ़ाया जा सकता है।

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