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बारिश से खराब होने लगे इंसुलेटर

बारिश होते ही पेसू के हाथ-पांव फूलने लगे हैं। ग्रिडों, फीडरों व सबस्टेशनों में बिजली के उपकरणों का उचित रखरखाव नहीं होने से हर दिन ब्रकडाउन होने का अंदेशा लगा रहता है। ट्रांसफार्मर जलने, तार टूटकर गिरने, ब्रकर खराब होने, कंडक्टर टूटने आदि की घटनाएं होती रहती हैं। इनदिनों इंसुलेटर खासकर अधिक परशान कर रहा है। अमूमन हर दिन किसी न किसी सबस्टेशन में इंसुलेटर के खराब होने से आपूर्ति बाधित हो जाती है। इंसुलेटर फटने की घटना होने पर तो पेसू के पसीने छूट जाते हैं। साथ ही लंबी अवधि तक बिजली भी गुल हो जाती है।ड्ढr ड्ढr पेसू के शहर में लगभग 43 सबस्टेशन हैं। सबस्टेशनों में कई तरह के इन्सुलेटर लगे होते हैं। बिजली की आपूर्ति में इनकी महती भूमिका होती है। इंसुलेटर की मदद से ही करंट को डिवाइड किया जाता है। अगर इंसुलेटर खराब हो जाए तो आपूर्ति सामान्य नहीं रह पाती है। मौसम में उतार-चढ़ाव का असर इनपर बहुत अधिक होता है। पहले धूप और फिर बारिश हो जाए तो इंसुलेटर का खराब होना लाजिमी ही है। कभी -कभी तो यह धमाके के साथ ‘ब्रस्ट’ भी कर जाता है। ऐसे में परेशानी बहुत बढ़ जाती है।ड्ढr ड्ढr अधीक्षण अभियंता एसकेपी सिंह बताते हैं कि बरसात के शुरुआती दिनों में इंसुलेटर बहुत अधिक परशान करते हैं। वीक लिंक फेल होकर एक्सपोज हो जाते हैं। नतीजतन इंसुलेटर खराब हो जाता है। हालांकि बारिश के बाद के दिनों में इसमें कमी आती है। दूसरी ओर कामगार दबी जुबान से इसके लिए इसकी गुणवत्ता पर भी सवालिया निशान खड़ा करते हैं। घटिया किस्म की इंसुलेटरों के चलते बिजली आपूर्ति में बाधा उत्पन्न हो जाती है।

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