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पांच फरवरी तक के ट्रांसफर पर अंक

पांच फरवरी तक के ट्रांसफर पर अंक

शिक्षा निदेशालय ने ट्रांसफर की अंतिम तिथि 31 जनवरी से आगे बढ़ाई, इस श्रेणी में मिलते हैं 5 अंक
नर्सरी दाखिले में पंजीकरण की प्रक्रिया जारी है। शिक्षा निदेशालय ने ट्रांसफर केस में आवेदन करने वालों को बड़ी राहत दी है। ट्रांसफर की अंतिम तिथि 31 जनवरी से बढ़ाकर पांच फरवरी तय की गई है यानी जिनका दिल्ली में एक जनवरी से पांच फरवरी तक ट्रांसफर हुआ वे आवेदन कर सकेंगे।

अतिरिक्त निदेशक (शिक्षा) मधुरानी तेवतिया ने बताया कि यह नियम निजी और सरकारी दोनों सेक्टर के कर्मचारियों पर लागू है। 31 जनवरी की तिथि समाप्त हो गई है लेकिन फिर भी बड़ी संख्या में ट्रांसफर केस वाले अभिभावक बचे हैं।

उन्हें मौका देते हुए ट्रांसफर की तिथि पांच फरवरी तय की गई। इतना ही नहीं, उन्होंने साफ किया कि दिसंबर के अंतिम दिनों में जिनका राजधानी में ट्रांसफर हुआ है वे आवेदन नहीं कर सकते हैं। ऐसे अभिभावकों को सामान्य तरीके से दूसरे वर्ग में आवेदन करना होगा।

बहरहाल, उपराज्यपाल नजीब जंग द्वारा नर्सरी दाखिले की नई गाइडलाइंस में 100 प्वाइंट के फॉर्मूले में पांच प्वाइंट ट्रांसफर केस के मिलते हैं। लेकिन इस वर्ग में हर कोई आवेदन नहीं कर सकता। नियम के मुताबिक, निर्धारित तिथि के बीच ही ट्रांसफर होना चाहिए। इस दफा तिथि एक जनवरी से 31 जनवरी थी। अब बढमकर पांच फरवरी किया गया है।

ट्रांसफर का प्रमाण पत्र जरूरी
अगर आप इस वर्ग में आवेदन करेंगे तो उसके लिए दो पत्र होने अनिवार्य हैं। किसी दूसरे शहर की कंपनी छोड़कर दिल्ली आने की स्थिति में पुरानी कंपनी का पदमुक्त पत्र प्रमाण के तौर पर स्कूल में जमा कराना होगा। दिल्ली में नई कंपनी ज्वाइन करने की स्थिति में सबूत के तौर पर पदभार पत्र दिखाना होगा। यही नहीं, अगर किसी अभिभावक का अन्य शहर से दिल्ली में ट्रांसफर होता है तो उसे ट्रांसफर से जुड़े कागजात दिखाने होंगे। इन दस्तावेजों के अभाव में ट्रांसफर वर्ग में आवेदन नहीं किया जा सकता।

दस्तावेज देखने के नियम अलग
क्या आवेदन करते समय कागजात दिखाने होंगे या सूची होने के वक्त, इस बाबत स्कूलों के नियम अलग-अलग हैं। कोई पंजीकरण के दौरान ही ट्रांसफर के कागजात मांग रहा है तो कोई इन्हें देखने के बाद ही फॉर्म जारी कर रही है। इसके अलावा ऐसे स्कूल भी हैं जिनका कहना है कि वे सूची जारी होने के बाद ही तमाम कागजातों की जांच करेंगे और उसके हिसाब से सीट देंगे। एक जैसे नियम न होने की वजह से अभिभावक परेशान हैं। इनका कहना है कि प्रमाण-पत्र सूची जारी होने के बाद लेने चाहिए क्योंकि कंपनी से कागजात तैयार करने में वक्त लगता है।

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