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रोल बढ़िया हो तो मजा आता है: अनिल यादव

फिल्मों में बीस साल से सक्रिय अनिल यादव आज किसी परिचय के मोहताज नहीं है। सौदागर, त्रिमूर्ति, जंगल, अपहरण, काफिला,तिरंगा, मोहरा जैसी हिट फिल्मों के जरिए इनकी अपनी एक अलग पहचान बन चुकी है। ‘जय हनुमान’ सीरियल के रावण को कौन भूल सकता है। सीरियल टीपू सुल्तान में भी इनकी अहम भूमिका थी। लंबे संघर्ष के बाद उन्होंने एक मुकाम हासिल किया है। उन्हें पर्दे पर आते ही दर्शकों को पता चल जाता है कि विलेन की इंट्री हो चुकी है। अब कुछ मार-धाड़ होगी। हालांकि अनिल को ‘एज ए एक्टर’कोई भी बढ़िया रोल करने में मजा आता है। लेकिन कुछ ऐसा हुआ है कि अबतक उनकी पहचान एक विलेन के रूप में ही अधिक हुई है। छोटे-मोटे रोल से शुरुआत करने वाले अनिल को अब मेन वीलेन की भूमिका मिलने लगी है। बिहार के होने के बावजूद पहली बार किसी भोजपुरी फिल्म में उन्होंने काम किया है।ड्ढr ड्ढr भोजपुरी फिल्म मुन्ना बजरंगी के प्रमोशन के सिलसिले में पटना पहुंचे अनिल ने ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत करते हुए बताया कि उनका जन्म गया में हुआ था। लेकिन पिछले बीस सालों से बिहार से दूर रहे। दिल्ली में पढ़ाई-लिखाई हुई व कॅरियर बनाने मुंबई पहुंचे। मुन्ना बजरंगी के अपने कैरक्टर को लेकर वे बहुत उत्साहित हैं। इस फिल्म के उनके किरदार की तुलना शोले के गब्बर सिंह से हो रही है। उन्होंने कहा कि एक कलाकार की बदौलत उन्हें निगेटिव व पाजिटिव दोनों रोल पसंद हैं। हालांकि वे ‘टाइप्ड’ नहीं होना चाहते हैं। एक नाटक में उन्होंने कामेडी भी की थी। पुराने जमाने के खलनायक स्व. मनमोहन से वे काफी प्रभावित हैं। वे कहते हैं कि मनमोहन साहब अधिक डॉयलॉग नहीं बोलते थे पर अपने एक्शन से ही वह बात डाल देते थे कि दर्शक उस कैरक्टर से घृणा करने लग जाता था। प्राण, अमरीश पुरी भी उनके पसंदीदा कलाकार रहे हैं।

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