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बुंदेलखंड: 'खादी' के आगे 'खाकी' बेबस

बुंदेलखंड: 'खादी' के आगे 'खाकी' बेबस

उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में 'खाकी' पर 'खादी' का दबदबा कायम है और महिलाओं के विरुद्ध हिंसा में लगातार इजाफा हो रहा है। बेबस पुलिस दुष्कर्म जैसे गंभीर मामलों और कातिलाना हमले के आरोपियों का भी कुछ नहीं बिगाड़ पा रही है।

खादीधारी नेताओं के आगे खाकी वर्दीधारी पुलिस वाले किस कदर बेबस हैं, इसकी एक बानगी देखिए:
मामला बांदा जिले के बिसंडा थाने के बछौंधा गांव से जुड़ा है। यहां 13 जनवरी की रात सोती हुई एक किशोरी को गांव के दो युवक अहमद व रईश तमंचे का भय दिखाकर उठा ले गए और गांव की बस्ती से लगे बाग में उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। तड़के पीडिता उनके चंगुल से छूटने के बाद घर पहुंची और अपनी मां के साथ थाने पहुंचकर उसने दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए रईश को तो गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, लेकिन अहमद को पकड़ने से कतरा रही है। वजह साफ है, खाकी पर खादी भारी पड़ रही है।

दुष्कर्म का मुख्य आरोपी अहमद प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवाद पार्टी (सपा) बांदा के जिलाध्यक्ष का सगा भतीजा बताया जा रहा है।

बिसंडा के थानाध्यक्ष कुंदन सिंह यादव का कहना है कि अहमद ने दुष्कर्म नहीं किया, इस घटना में वह सिर्फ एक सहयोगी रहा है। जबकि पीडिता ने अदालत में सीआरपीसी की धारा-164 के तहत दर्ज कराए अपने बयान और बांदा के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) को दिए शपथपत्र में अहमद पर सबसे पहले दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है।

थानाध्यक्ष के बयान से उनकी मंशा साफ झलकती है कि वह अहमद को बचाना चाहते हैं। उनकी दिक्कत यह है कि वह मन की बात जुबां पर ला नहीं सकते क्योंकि 'खादी' उन पर भारी पड़ रही है।

इस मसले पर चित्रकूटधाम परिक्षेत्र के डीआईजी सुग्रीव गिरि हालांकि बेबाक बोले। उन्होंने कहा, ''दुष्कर्म के आरोपी को अब तक जेल में होना चाहिए, इस मामले में बिसंडा पुलिस की लापरवाही से इनकार नहीं किया जा सकता।''

उन्होंने बताया कि बबेरू के पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) को आरोपी की गिरफ्तारी और स्थानीय पुलिस की लापरवाही की जांच के आदेश दिए गए हैं। वहीं बबेरू के सीओ ने बताया कि फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की दो टीमें बनाई गई हैं और पुलिस की लापरवाही की भी जांच की जाएगी।

उधर, पीडिता की मां का कहना है कि आरोपी खुलेआम गांव में घूम रहा है और उनकी बेटी को धमका रहा है कि वह अपना बयान बदल ले, वरना अंजाम बुरा होगा। पीडिता की मां ने बताया कि मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस सिर्फ एक बार रईश को गिरफ्तार करने उनके गांव आई थी।

सपा के बांदा जिलाध्यक्ष शमीम बांदवी ने अपनी सफाई में बिल्कुल पाक-साफ नजर आए और उन्होंने बिल्कुल मंजे हुए नेता की तरह कहा कि घटना में भतीजे अहमद का नाम आते ही उन्होंने उससे अपने सारे संबंध तोड़ लिए हैं। वह यह भी कहने से नहीं चूके कि पुलिस पर कोई दबाव नहीं डाला गया, आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी होनी चाहिए।

मामला सत्तापक्ष से जुड़ा हो और विपक्ष हमलावर न हो, ऐसा संभव ही नहीं है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा विधायक दल के उपनेता और बांदा जिले की नरैनी सीट से विधायक गयाचरण दिनकर कहते हैं कि सामूहिक दुष्कर्म के इस मामले में खादी के आगे खाकी लाचार है और इसी दबाव में पुलिस आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर रही है।

उन्होंने कहा कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) इस मामले को विधानसभा में उठाएगी। कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष साकेत बिहारी मिश्र का कहना है कि सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव का दुष्कर्म पीडिताओं को न्याय दिलाने का वादा हवा-हवाई हो गया है, जब सपा से जुड़े लोग ही ऐसी घटनाओं को अंजाम देंगे तो न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

बुंदेलखंड में दुष्कर्म और महिलाओं के विरुद्ध हिंसा की लगातार हो रहीं घटनाओं पर महिला जनसंगठनों की रहस्यमय चुप्पी भी चिंता का विषय बनी हुई है। गुलाबी गैंग के राष्ट्रीय संयोजक जयप्रकाश शिवहरे कहते हैं कि संपत पाल संगठन की अगुआई करती आई हैं, इस समय उनका 'कांग्रेसीकरण' हो गया है। वह चुप क्यों हैं, वही जानें।

शिवहरे कहते हैं कि संगठन की जिला इकाई की तत्काल बैठक बुलाई गई है और जल्द ही पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।

'नागिन' और 'कोबरा गैंग' की केंद्रीय समन्वयक नेहा कैथल (शीलू) कहती हैं कि उनके संगठन ने बांदा के कालूकुआं में दो बहनों पर हुए कातिलाना हमले और बछौंधा गांव के सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर जिले के पुलिस अधिकारियों को ज्ञापन सौंप चुका है, यदि तीन दिन में गिरफ्तारी न हुई तो उनके संगठन आंदोलन करेंगे।

बुंदेलखंड की महिलाएं असमंजस में हैं कि वे पुलिस पर भरोसा करें या नेताओं पर या जनसंगठनों पर? उन्हें तो न्याय चाहिए।

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