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18 करोड़ की दवा खरीद में घोटाला

रांची। विशेष संवाददाता। झारखंड में प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए वर्ष 2010-11 में 18 करोड़ रुपए की दवा खरीदी गई थी। इसमें बड़े पैमाने पर घोटाले की पुष्टि हुई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नगिरानी विभाग को इस मामले की जांच का आदेश दिया है। सीएम के आदेश के बाद स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई है। स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले की आंतरिक जांच कराए थे, जिसकी रिपोर्ट दो हजार पृष्ठों की है।

इसमें यह भी कहा गया था कि झारखंड के सभी जिलों के सिविल सर्जन, सभी चिकित्सा महाविद्यालयों और औषधि निदेशालय के शामिल होने के कारण जांच में कठिनाई हो रही है। औषधि निर्माता कंपनियों द्वारा भी सहयोग नहीं किया जा रहा है और कई जिलों के सिविल सर्जन भी जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे।

स्वास्थ्य विभाग के आंतरिक रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि घोटाले की जांच किसी बड़े एजेंसी से करायी जानी चाहिए। क्या है आरोप : भारत सरकार की कंपनी हिन्दुस्तान एंटीबायोटिक पुणे, बंगाल केमिकल्स कोलकाता, इंडियन ड्रग्स फार्मा लिमिटेड गुड़गांव (सभी कंपनियां बीआइएफआर में हैं और इनका अपना कोई दवा उत्पादन नहीं हो रहा है) इनसे ही दवा खरीद का दावा झारखंड के स्वास्थ्य विभाग ने किया है।

जिलावार राशि आवंटन की सूचीरांची 70 लाखहजारीबाग 50 लाखदुमका 15 लाखपलामू 15 लाखचाईबासा 40 लाखबोकारो 20 लाखचतरा 50 लाखरामगढ़ 40 लाखदेवघर 20 लाखसाहेबगंज 30 लाखपाकुड़ 30 लाखगिरिडीह 15 लाखजमशेदपुर 15 लाखसरायकेला 15 लाखगोड्डा 50 लाखलातेहार 15 लाखजामताड़ा 15 लाखसिमडेगा सात लाखलोहरदगा 16 लाखखूंटी 10 लाखकोडरमा 20 लाखगढ़वा 40 लाखधनबाद 20 लाखगुमला 20 लाखइसके अलावा एमजीएम कॉलेज, जमशेदपुर के अधीक्षक को 1.53 करोड़, पीएससीएच, धनबाद के अधीक्षक को 10 लाख, रिम्स के निदेशक को चार करोड़, स्वास्थ्य निदेशक को दो करोड़ की राशि आवंटित की गई थी।

इसी में घपला हुआ है। दवा खरीदी ही नहीं गयी थी।

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