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मेजर अविनाश के अंतिम दर्शन को उमड़ा जनसैलाब

पारू। हिन्दुस्तान संवाददाता। दिवंगत मेजर अविनाश आनंद का पार्थवि शरीर शुक्रवार को अहले सुबह पैतृक गांव पारू कसबा पहुंचते ही अंतिम दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। सुबह साढ़े सात बजे मेजर अविनाश आनंद का पार्थवि शरीर लेकर मेजर अभिजीत अपने अन्य सहयोगियों के साथ गांव पहुंचे। ताबूत में रखे पार्थवि शरीर को मेजर के घर में रखा गया।

बाद में निकली शवयात्रा में हजारों लोग शरीक हुए। नारायणी नदी के रेवाघाट पर मेजर के छोटे भाई रोहित कुमार ने मुखाग्नि दी। दाह-संस्कार के समय पूरा माहौल कारूणिक था और श्मशान घाट पर मौजूद लोगों की आंखों से भी आंसू निकल पड़े।

पुणे से आये मेजर अभिजीत, कैप्टन कार्तिक मनराल व अन्य जाबांजों ने अपने दविंगत साथी को श्रद्धांजलि दी। मौके पर क्षेत्रीय विधायक अशोक कुमार सिंह, पूर्व विधायक सह राजद जिलाध्यक्ष मिथिलेश प्रसाद यादव, बीडीओ सुनील कुमार सिंह, बसपा नेता शंकर महतो, पूर्व जिला पार्षद मदन चौधरी, पूर्व मुखिया वीरेंद्र चौधरी भी थे।

राजद नेता ने लगाया प्रोटोकॉल उल्लंघन का आरोपराजद के प्रदेश महासचवि भूपाल भारती ने दविंगत मेजर अविनाश आनंद के अंतिम संस्कार के दौरान जिला प्रशासन पर सेनाधिकारी के सम्मान में प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।

श्री भारती ने कहा कि जिला प्रशासन के किसी अधिकारी का न होना अधिकारी के सम्मान में धोखाधड़ी है। किसान परिवार से मेजर बना था अविनाश दिवंगत अविनाश आनंद ने साधारण किसान परिवार में जन्म लेकर मेजर बनने तक का सफर तय किया।

अविनाश के पिता उमानाथ उपाध्याय एक साधारण किसान थे। वर्ष 2006 में अविनाश ने नेशनल डिफेंस एकेडमी की परीक्षा पास कर देश भर में सातवां स्थान प्राप्त कर सूबे का नाम रौशन किया था और पदोन्नति पाकर मेजर तक का सफर तय किया।

अविनाश के पठन-पाठन में नाना गजाधर तिवारी का अहम योगदान रहा। अविनाश ने मुजफ्फरपुर व रांचीं से अपनी पढ़ाई पूरी की। अविनाश अपने पीछे माता-पिता, पत्नी व तीन छोटे भाई को छोड़ गये हैं। अब फोनवा पर बात कोन करतई रे बाप..पारू।

बाप रे बाप..हमर बउआ कहां चल गेलई हे भगवान। अब हमरा के फोन कर के मम्मी कईसन बारू.. अब कौन पूछतई रे बाप। दिवंगत मेजर की मां मंजू उपाध्याय रोते हुए यही बात कह रही थीं। उनकी चित्कार से आसपास के लोगों की भी आंखें भर आयीं।

वहीं मेजर के पार्थिव शरीर से लिपट कर पत्नी सुजीता आनंद रोते-रोते बेहोश हो गई। पिता उमानाथ उपाध्याय भी बेसुध होकर पड़े रहे। जबकि अविनाश के तीन छोटे भाई संजीत कुमार, अभिषेक कुमार, रोहित कुमार, बहन अंजली व बहनोई रजनीश भी मेजर के पार्थवि शरीर से लिपट कर रो रहे थे। वहीं पूरा गांव गहरे शोक में डूबा रहा। (हसिं)।

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