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एटीएम कैश गबन मामले में बदले गये जांच पदाधिकारी

मुजफ्फरपुर। वरीय संवाददाता। एटीएम में डालने की बजाय साढ़े तीन करोड़ रुपये लेकर चंपत होने के मामले की जांच की जिम्मेदारी से दारोगा राजेश कुमार को मुक्त कर दिया गया है। इंस्पेक्टर सुधाकर नाथ को नया जांच पदाधिकारी बनाया गया है। बीते दिनों मामले की गंभीरता को देखते हुए इंस्पेक्टर स्तर के पदाधिकारी को जांच की जिम्मेवारी सौंपने का निर्णय लिया गया था।

इसके आलोक में एसएसपी ने इंस्पेक्टर सुधाकर नाथ को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। एक जनवरी को सदर थाने में एसबीआई के एटीएम में कैश डालने वाली एजेंसी एसआईएस की ओर से कस्टोडियन सूरज कुमार सिंह व अमरेन्द्र कुमार सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

चौथे दिन ही उदासीनता के आरोप में प्रथम जांच पदाधिकारी दारोगा अरुणंजय कुमार से केस वापस ले लिया गया। दारोगा राजेश कुमार को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गयी। विस्तृत जांच में गबन की राशि साढ़े तीन करोड़ पहुंचने के बाद डीआईजी अमृत राज ने मामले की तीन बार समीक्षा की गयी।

विस्तृत जांच व आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम गठित की गई, लेकिन अब तक मुजफ्फरपुर के कस्टोडियन अमरेन्द्र कुमार सिंह व सूरज कुमार सिंह पुलिस के हत्थे नहीं चढेम्। इधर, बाद में एसआईएस के कस्टोडियन विकास व मयंक के खिलाफ सीतामढ़ी में भी गबन की एफआईआर करायी गयी।

सीतामढ़ी के भी दोनों कस्टोडियन पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सके हैं। पुलिस अधिकारी का कहना है कि शुरू से ही इंस्पेक्टर सुधाकर नाथ विशेष टीम के साथ कैश गबन मामले की जांच में जुटे हुए है। इसलिए उन्हें जांच की जिम्मेवारी सौंपी गयी है।

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