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अपनों के पीछे छोड़े हैं जासूस

दिल्ली यूनिवर्सिटी में इस साल शरलक होम्स के जासूसी के सार फामरूले इस्तेमाल होते नजर आ रहे हैं। अभिभावकों ने पहले अपने बच्चों पर नजर रखने के लिए जासूसों की मदद ली। लेकिन नई पीढ़ी उनसे भी दो कदम आगे निकली। छात्र भी कैम्पस में इन जासूसों को ढूँढ़ निकालने के लिए डिटेक्िटव एजेंसियों की शरण में पहुँच गए हैं।ड्ढr ड्ढr इस साल दिल्ली यूनिवर्सिटी में काफी संख्या में ‘स्पाई स्टूडेंट्स’ नजर आ रहे हैं। इन्हें अभिभावकों ने प्राइवेट डिटेक्िटव एजेन्सियों की मदद से अपने बच्चों पर नजर रखने के लिए नियुक्त किया है। लेकिन बच्चों ने इससे निपटने के लिए अन्य डिटेक्िटव एजेन्सियों की मदद ली है। छात्र यह जानने की कोशिश कर रहे हैं उनके अभिभावकों ने किसी जासूस खासतौर पर किसी लड़की को तो उनकी गतिविधियाँ जानने के लिए नियुक्त नहीं किया है। एसोसिएशन ऑफ डिटेक्िटव एजेन्सीज ऑफ इंडिया के अध्यक्ष कुँवर विक्रम सिंह ने बताया कि छात्र डिटेक्िटव एजेन्सियों को केस लेने के लिए एक अच्छी रकम भी अदा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि छात्र ये जानने की कोशिश कर रहे हैं कि जासूसों ने उनके बार में क्या सूचनाएँ इकट्ठा की है। रामजस कॉलेज के एक छात्र रितेश(बदला हुआ नाम) ने बताया कि कैम्पस में जासूसी की खबर ने मुझे चिंता में डाल दिया। मुझे अपने मम्मी-डैडी पर भी शक हुआ। वह पिछले कुछ दिनों से मेर फ्रेंड सर्किल के बार में ज्यादा पूछताछ कर रहे हैं। तब मैंने एक डिटेक्िटव एजेंसी की मदद ली।

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