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वृहत योजना बनाने की जरूरत

औद्योगिक प्रतिष्ठानों एवं शहर की बस्तियों का प्रदूषित पानी नालों के द्वारा नदी में गिरता है। भारी वर्षा तथा नालों का पानी मिलकर बाढ़ का रूप ले लेते हैं। जिससे निचले इलाकों में बस्तियां डूब जाती हैं। स्लम एरिया तथा शहर में नालों की सफाई नहीं होने से वर्षा होते ही घरों में पानी घुसना आम बात है।ड्ढr अत: यह आवश्यक है कि नदी के स्वभाव तथा धारा के प्रवाह को ध्यान में रखकर तटबंध बनाये जायें और शहर के अंदर जहां-तहां स्लैग डंपिंग न कर योजनाबद्ध तरीका अपनाया जाये। बस्तियों के बीच से गुजरने वाले नालों को भूमिगत करने की जरूरत है। इससे बहुत हद तक बाढ़ पर नियंत्रण पाया जा सकता है।ड्ढr बाढ़ से प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल अव्यावहारिक है। स्थानीय स्तर पर सौ-दौ नावें तैयार रहें, नाविकों का जत्था (मछुआर, मल्लाहों) तैयार रखा जाये। यह समाज नदियों की गोद में पला-बढ़ा है। वर्षा की स्थिति के बार में हमें पहले ही पता चल जाता है, उसी के आधार पर उन्हें तैयार रखा जा सकता है। नाविक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री आसानी से पहुंचा सकते हैं। रािस्टर तैयार कर जिला प्रशासन इलाके की प्रमुख संस्थासंगठन का सहयोग लेते हुए प्रभाव एरिया को चिह्नित कर, राहत सामग्री नाव, नाविक तैयार कर एरिया चिह्नित कर दें। हेलीकॉप्टर की अपेक्षा इस तरह की व्यवस्था पर खर्च भी कम आयेगा तथा आपदा प्रबंधन की राशि की एक-एक पाई बाढ़ पीड़ितों का पहुंचायी जा सकेगी।ड्ढr मनुष्य सदियों से नदी के किनार ही जीवन-यापन करता आया है। नदियों से विकास तथा विनाश दोनों हो सकता है। बाढ़ को नियंत्रित करने के लिए उसके पानी को तालाबों तथा जलाशयों में जमा कर विकास के विभिन्न आयामों को प्रोत्साहित किया जा सकता है। इसके लिए राज्य स्तर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर वृहत योजना बनाने की जरूरत है, तभी बाढ़ के विनाश के बचा जा सकता है।ड्ढr (लेखक भाजपा विधायक और राज्य के पूर्व वित्त मंत्री हैं।)

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  • Web Title: वृहत योजना बनाने की जरूरत