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मुद्रास्फीति का विकास पर असर नहीं : रेड्डी

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर वाई वेणुगोपाल रेड्डी ने सोमवार को कहा कि मुद्रास्फीति के 13 वर्षो के रिकार्ड को तोड़कर उच्चतम स्तर 11.05 प्रतिशत पहुंचने का तत्काल यह अर्थ नहीं निकाला जा सकता है कि इससे आर्थिक विकास पर विपरीत असर पड़ेगा। रेड्डी ने एक कार्यक्रम में कहा कि रिजर्व बैंक मांग की निगरानी और प्रंबधन अपने स्तर पर कर रहा है और महंगाई को नियंत्रित करने के लिए उपाय किए गए हैं और आवश्यकता पड़ने पर कुछ और उपाय किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अभी हम इस मुद्दे और विकल्प का गहराई से अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तेल की कीमतें बढ़ने से मूल्यों पर दबाव बढ़ा है और ऐसे उपाए किए जा रहे हैं, जिसका अर्थव्यवस्था पर असर नहीं पड़े। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वह मुद्रास्फीति का विकास पर विपरीत प्रभाव पड़ता नहीं देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस समस्या का समाधान करने में विकास को अवरूद्ध करने की आश्वयकता नहीं पड़ेगी। रेड्डी ने कहा कि वर्तमान स्थिति में इसमें इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जाना चाहिए कि विकास पर विपरीत असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में मुद्रास्फीति दर बढ़ाने में पांच प्रमुख कारक हैं। रेड्डी ने कहा कि पहला कारक पेट्रोलियम पदार्थों के मूल्यों के हाल में हुई वृद्धि शामिल है। दूसरा तेल के मूल्य में हुई वृद्धि ने मुद्रास्फीति के दबाव को सबसे ऊपर पहुंचा दिया है। तीसरा यह कि तेल की वर्तमान वैश्विक दरें नियमित रूप से इसी स्तर नहीं बनेगी रहेगी। चौथे कारक के रूप में उन्होंने कहा कि तेल की कीमतें पूरे विश्व में बढ़ी है और इससे विकसित और विकासशील सभी देशों में मुद्रास्फीति की समस्या पैदा हुई है। उन्होंने कहा कि अंतिम और पांचवा कारक तेल की कीमतों में रिकार्ड स्तर पर पहुंचना अस्थाई नहीं भी हो सकता है। इसलिए पूरी अर्थव्यवस्था और हमारे समाज को तेल की कीमतों में जारी उथल-पुथल और इसके संभावित नई ऊंचाइयों पर पहुंचने से बेहतर तरीके से निपटने की आवश्यकता है। रेड्डी ने बताया कि शुक्रवार को मुद्रास्फीति के नए आंकड़े जारी होने के तत्काल बाद रिजर्व बैंक के संबंधित विशेषज्ञों के साथ ही मौद्रिक नीति पर तकनीकी सलाहकार समिति के सदस्यों से विस्तृत चर्चा की गई है। उन्होंने बताया कि मुद्रास्फीति से निपटने के लिए रिजर्व बैंक ने पहले भी कदम उठाए थे तथा आगे और कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इसी के तहत गत अप्रैल में नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) और रेपो दरें बढ़ाई गई थी। केन्द्रीय बैंेक ने गत 11 जून को रेपो दर में 25 बेसिस प्वांइट की वृद्धि कर इसे आठ प्रतिशत कर दिया था। गत अप्रैल और मई में सीआरआर में तीन बार वृद्धि की गई और अभी यह 8.25 प्रतिशत पर है। उन्होंने कहा कि हमारे वित्तीय और विदेशी सेक्टर इससे निपटने की प्रक्रिया से लड़ने के लिए सक्षम और मजबूत हैं। उन्होंने कहा कि वित्तीय मामले में हम सुरक्षित स्थिति में हैं और खाद्यान्न के क्षेत्र में उत्पादन बढ़ने की पूरी संभावना है। रिजर्व बैंक को मार्च 200में समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष में विकास दर आठ से साढ़े आठ प्रतिशत के बीच रहने की संभावना है। हालांकि आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई के दबाव में मौद्रिक नीति का कड़े करने के तहत उठाए जाने वाले कदम से विकास दर में कमी आ सकती है।ं

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