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आस्ट्रेलिया को मना नहीं पाए प्रणव

विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी अपनी आस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान सरकार से यूरनियम हासिल करने का स्पष्ट वादा नहीं ले पाए। पर उसका विरोध कुछ कम करने में जरूर कामयाब हुए हैं। उम्मीद बनती है कि अगर वाम दलों ने भारत को आई.ए.ई.ए, से सेफगार्ड एग्रीमेंट करने की इजाजत दे दी और उसके बाद मामला न्यूक्िलयर सप्लायर्स ग्रुप में गया, तो वहां आस्ट्रेलिया के विरोध का सामना संभवत: नहीं करना पड़ेगा। विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी को भारत पर लगे हाई टेक्नोलॉजी और न्यूक्िलयर ईंधन पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटाने के लिए घरलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों मोर्चे पर संघर्ष करना पड़ रहा है। घरलू मोर्च पर जहां उन्हें वाम दलों को मनाना पड़ रहा है, तो अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर उन देशों को मनाना पड़ रहा है जो भारत के एनपीटी पर हस्ताक्षर न करने की वजह से भारत को कोई भी रियायत नहीं देना चाहते। इस सिलसिले में उन्होंने हाल ही में चीन की यात्रा की और फिर आस्ट्रेलिया की नई सरकार को भारत के परमाणु अप्रसार का यकीन दिलाने पहुंचे। सोमवार सुबह हुई भारत व आस्ट्रलिया क विदश मंत्रियों की वार्ता मं प्रणब मुखर्जी व स्टीफन स्मिथ न दोनों दशों क मजबूत द्विपक्षीय संबंधों पर बल दिया। इस मौके पर आपराधिक मामलों स कुशलतापूर्वक निपटन क लिए एक प्रत्यर्पण संधि और परस्पर कानूनी सहयोग संधि पर हस्ताक्षर भी हुए। लेकिन यूरनियम आपूर्ति पर आस्ट्रेलिया के रुख में कोई नरमी नहीं आई। चीन के बार में शंका जताई जाती रही है कि वह एनएसजी में कहीं भारत को छूट का विरोध न कर। आस्ट्रेलिया की पिछली सरकार भारत को यूरनियम देने को तैयार हो गई थी। पर परमाणु अप्रसार समर्थक लेबर पार्टी की सरकार आते ही आस्ट्रेलिया ने इस मसले पर अपना रुख बदल दिया । इससे आस्ट्रेलिया के बार में भी शंका पैदा हो गई थी। अमेरिका के बार में भी यही आशंका जताई जा रही है। विदेश मंत्रालय सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चिंता यही है कि अमेरिका में डेमोक्रेटिक सरकार बनते ही करार के मौजूदा रूप को खतरा पैदा हो सकता है।ड्ढr

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