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करार भी और सरकार भी

परमाणु करार पर निर्णायक कदम उठाने की जरूरत को देखते हुए कांग्रेस और संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कमान स्वयं संभाल ली है। श्रीमती गांधी ने इस मसले पर घटक दलों को एकजुट करने के लिए उनसे बातचीत का सिलसिला भी शुरू कर दिया है। श्रीमती गांधी ने सोमवार को अपने निवास पर अलग-अलग बैठकों में लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान, राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद और राकांपा प्रमुख शरद पवार के साथ विचार-विमर्श किया।ड्ढr ड्ढr ऐसा माना जा रहा है कि सोनिया ने परमाणु करार पर घटक दलों को एकजुट करने के लिए यह अभियान छेड़ा है ताकि इस मसले पर डटे वामदलों पर उनके रुख में लचीलापन लाने का दबाव बनाया जा सके। इस बीच माकपा महासचिव प्रकाश करात ने पवार से मिलकर उन्हें वामदलों के रुख से अवगत कराया। अमेरिका में बुश प्रशासन के रहते करार को अमली जामा पहनाने की समय सीमा तेजी से खत्म हो रही है तथा करार पर आगे बढ़ने के लिए सरकार को इसी माह के अंदर फैसला करना होगा। वामदलों के कड़े विरोध के बावजूद सरकार तथा कांग्रेस करार पर आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता लगातार जाहिर कर रही हैं। ऐसे में इस मसले पर राजनीतिक फैसला लेने का वक्त आ गया है।ड्ढr ड्ढr इस मसले पर सरकार की ओर से विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी सभी घटक दलों से बातचीत कर चुके हैं तथा सभी घटक दल करार पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस के प्रवक्ता शकील अहमद ने सोमवार को कहा कि हम परमाणु करार को राष्ट्रीय हित में मानते हैं और इस पर आगे बढ़ना चाहते हैं लेकिन हम इस पर वामदलों को भी साथ लेकर चलना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि संप्रग-वामदलों की समिति की 25 जून को बैठक हो रही है जिसमें बातचीत के बाद इस मसले पर फैसला किया जाएगा। करार पर आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता को देखते हुए माकपा महासचिव प्रकाश करात तथा भाकपा के राष्ट्रीय सचिव डी राजा ने रविवार को चेन्नई में द्रमुक प्रमुख एम. करुणानिधि से मुलाकात कर इस मसले पर मध्यस्थता करने का आग्रह किया था। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री करार को आगे बढ़ाने के लिए काफी उत्सुक हैं और वह चाहते हैं कि इस मसले पर कोई अंतिम फैसला ले लिया जाए। सूत्रों ने इस बात से इंकार नहीं किया कि डा. सिंह अगले माह के पहले सप्ताह में जापान में जी-आठ समूह की बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश से होने वाली मुलाकात के लिए कुछ सकारात्मक संकेत चाहते हैं। कांग्रेस के सामने एक दुविधा यह भी है कि वह पिछले चार वर्ष से केंद्र में सरकार चलाने में सहयोग दे रहे वामदलों को एक दम से दरकिनार कैसे कर दिया जाए, क्योंकि लोकसभा चुनाव के बाद भी आपसी सहयोग की जरूरत पड़ सकती है।ड्ढr परमाणु करार को देशहित में बता रही कांग्रेस इससे एकदम से पीछे भी हटना नहीं चाहती। करार नहीं तो यूरनियम नहींड्ढr कनबरा (एजेंसियां)। आस्ट्रलिया सरकार भारत का यूरेनियम क निर्यात पर लग प्रतिबंध का तब तक नहीं हटाएगी जब तक भारत परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं कर दता। आस्ट्रलिया न कहा है कि वह भारत को यूरनियम बच सकता है, बशर्त भारत सुरक्षा मानकों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताओं को दूर करत हुए अमेरिका क साथ परमाणु करार कर। हालांकि आस्ट्रेलिया ने सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन किया।ड्ढr आस्ट्रलिया क विदश मंत्री स्टीफन स्मिथ न सोमवार को यहां विदश मंत्री प्रणव मुखर्जी क साथ मुलाकात क दौरान यह बात कही। मुलाकात क बाद संवाददाता सम्मलन मं स्मिथ न कहा कि हालांकि, आस्ट्रलिया की स्पष्ट नीति है कि वह परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर न करन वाल दश को यूरनियम नहीं बचगा लकिन मौजूदा लबर पार्टी सरकार भारत—अमेरका परमाणु करार पर गंभीरता स नजर रख हुए है। उन्होंन कहा कि 123 समझौत क अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजंसी (आईएईए) या परमाणु आपूíतकर्ता दशों क समूह (एनएसजी) मं पंहुचन क बाद ही आस्ट्रलिया भारत को यूरनियम की आपूíत क बार मं विचार करगा। स्मिथ न कहा कि जब हम इस बार मं विचार करंग उस समय भारत क लिए इसक महत्व और इस बार मं उसकी दलीलों को दिमाग मं रखकर ही कोई फैसला करंग। हालांकि, दोनों नताओं न भारत और आस्ट्रलिया क परमाणु निरस्त्रीकरण रिकार्ड बहतर होन का हवाला दत हुए यूरनियम आपूíत की संभावना क संकत दिए। साथ ही मुखर्जी और स्मिथ न इसकी तुलना एसी रलगाड़ी स की जिसक गंतव्य पर पंहुचन का समय अभी निर्धारित नहीं किया गया है।ड्ढr ड्ढr मुखर्जी न कहा कि जिस समय हमं यूरनियम की जरूरत होगी स्वाभाविक रूप स तब तक इस दिशा मं वांछित प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी और आस्ट्रलिया स आपूíत का सवाल भी तब ही उठगा। स्मिथ न कहा कि वैश्विक मंच पर भारत क निरंतर बढ़त महत्व क बार मं कोई शंका नहीं है। उन्होंन कहा कि इसक मद्दनजर सुरक्षा परिषद क विस्तार क साथ भारत को इसकी सदस्यता दी जानी चाहिए। गौरतलब है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरत का महज तीन प्रतिशत ही परमाणु ऊर्जा स पूरी करता है और अमेरिका क साथ परमाणु करार कर इस 2016 तक नौ प्रतिशत तक ल जान का लक्ष्य है। दोनों नताओं न कहा कि उन्होंन आíथक और सुरक्षा मामलों मं आपसी सहयोग बढ़ान पर विचार-विमर्श किया। आतंकवाद स निपटन मं साझा प्रयास स जुड़ समझौत पर हस्ताक्षर भी किए गए। इसक तहत दोनों दशों क बीच रक्षा और खुफिया मामलों पर सालाना बातचीत करन और अपराधियों क प्रत्यर्पण का भी जिक्र किया गया है।

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