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भेदभाव के लिए औरतें भी जिम्मेवार

समाज में भेदभाव के लिए औरतें भी जिम्मेवार हैं। वे अपने स्वभाव और दब्बूपन से बाहर आना नहीं चाहतीं हैं। इससे बाहर निकलने के लिए महिलाओं को खुद आगे आना होगा, तभी औरतें पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिला कर काम कर सकतीं हैं। उक्त बातें राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष लक्ष्मी सिंह ने कहीं। वे एक्सआइएसएस सभागार में आयोजित जेंडर और विकास पर प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोल रहीं थीं, जिसका उद्घाटन 24 जून को किया गया।ड्ढr वीमेंस लिंक पत्रिका भारतीय सामाजिक संस्थान नयी दिल्ली और नारी संवाद के तत्वावधान में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य जेंडर के प्रति लोगों को जागरूक करना था, ताकि समाज का समग्र विकास हो और लिंगभेद को खत्म किया जा सके। कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए रणु दीवान ने कहा कि लिंगभेद दूर करने के सभी कारकों को व्यवहार में लाने की जरूरत है। विशिष्ट अतिथि प्रो बहुरा एक्का ने भी जेंडर के प्रति लोगों की जागरूकता को जरूरी बताया। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता प्रो मंजू ज्योत्सना ने और धन्यवाद ज्ञापन सिस्टर जेम्मा ने किया।ड्ढr द्वितीय सत्र में वीमेंस यूनिट नयी दिल्ली की अल्का श्रीवास्तव और अरानी सिन्हा ने प्रशिक्षार्थियों के बीच लिंगभेद पर चर्चा करते हुए ग्रास रूट स्तर पर इसे दूर करने की बात कही। इस संदर्भ में अन्य राज्यों की स्थिति से भी अवगत कराया गया। चार दिनी इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में आशा किरण, मंथन सहित अन्य संस्थाओं के सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ ही साथ रांची विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं भी भाग ले रहे हैं।

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