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जया बच्चन की सदस्यता खतरे में

जया बच्चन की राज्य सभा सदस्यता फिर खतर हैं। पहले उनकी सदस्यता फिल्म विकास परिषद के अध्यक्ष पद पर रहते लाभ का पद होने के कारण चली गई थी। बाद में उसी सीट के उप चुनाव में नामांकनपत्र के साथ दाखिल शपथपत्र में भूखण्ड के संबंध में तथ्य छुपाना अब फिर महँगा पड़ सकता है। चुनाव अधिकारी ने एक शिकायत के बाद जाँच में इसेड्ढr अपराधिक कृत्य मानते हुए उन्रके खिलाफ पुलिस में रपट दर्ज कराई है।ड्ढr ड्ढr जया ने राज्य सभा की सीट के उप चुनाव में निर्वाचन अधिकारी के समक्ष एक जून 2006 को जो नामांकनपत्र दाखिल किया था, उसके साथ लगाए गए शपथपत्र में अपनी व अपने परिवार के संबंध में सम्पत्ति का जो ब्यौरा दिया था, उसमें अपने पति अमिताभ बच्चन के नाम बाराबंकी में केवल एक भूमि का उल्लेख किया था।दो अन्य भूखण्डों का उल्लेख नहीं किया। इस बार में बाराबंकी के अमीर हैदर एडवोकेट ने चुनाव आयोग से 28 जून 2006 को शिकायत की थी और कहा था कि जानकारी को छुपाना कानूनन जुर्म है। इस बार में भारतीय दण्ड संहिता की धारा 1और 1े तहत सजा का प्रावधान है। इसलिए जया बच्चन की राज्य सभा सदस्यता समाप्त कराने के लिए कार्यवाही की जाय।ड्ढr ड्ढr चुनाव आयोग के निर्देश पर निर्वाचन अधिकारी ने जया बच्चन को नोटिस जारी की थी जिसमें जया बच्चन ने सफाई दी कि अन्य दो भूखण्ड का तहसीलदार द्वारा दाखिल खारिज चार जुलाई 2006 को किया गया इसलिए उन्होंने अपने एक जून 2006 के शपथपत्र में उसका उल्लेख नहीं किया। इसके बाद निर्वाचन अधिकारी ने बाराबंकी के जिलाधिकारी से इस बार में रिपोर्ट माँगी, जिसमें अमिताभ बच्चन के नाम दो अन्य भूखण्ड नामांकन दाखिल करने के पूर्व 15 मई 2007 को खरीदे गए थे। निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि प्रश्नगत तीनों भूमि के बार में यह विवाद नहीं रह गया है कि उक्त भूमि अमिताभ बच्चन के नाम हैं। जया बच्चन द्वारा अमिताभ बच्चन की शेष दो जमीनों का उल्लेख उनके शपथपत्र में होना चाहिए था, जो नहीं किया गया है। इससे निष्कर्ष निकलता है कि जया बच्चन ने एक जून 2006 को चुनाव अधिकारी को दिए गए शपथपत्र में सही तथ्यों का उल्लेख नहीं किया है और उसमें अमिताभ बच्चन के नाम की दो जमीनों का उल्लेख न करके तथ्यों को छिपाया है। इस तरह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125-क सपठित धारा-क के प्रावधान के तहत भारतीय दण्ड संहिता की धारा 177 के अन्तर्गत दण्डनीय अपराध हैं। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 1में मिथ्या प्रविष्टि या मिथ्या कथन आता है, जिसके तहत धारा 1में अधिकतम सात वर्ष की सजा और जुर्माना किया जा सकता है।

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