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नवादा की वीणा देवी भारत की सर्वश्रेष्ठ मुखिया की जीत चुकी हैं अवार्ड

पाकिस्तान में अपने अनुभव बांट चुकी हैं वीणाड्ढr अशोक प्रियदर्शीड्ढr नवादा। नवादा जिल के सदर प्रखण्ड के लोहरपुरा पंचायत की वीणा देवी मुखिया ब्राण्ड अम्बेसडर हैं,जो राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर मुखियों का प्रतिनिधित्व कर चुकी है। वीणा को द बेस्ट मुखिया ऑफ इंडिया से नवाजा गया है। हाल में भारत सरकार के निर्देश पर गठित 21 सदस्यीय राज्य महिला कोर कमेटी में भी वीणा को शामिल किया गया है।ड्ढr वीणा देवी समाजसेवी पद्मश्री सुधा वर्गीज के साथ मिलकर निर्वाचित महिलाओं को एक मंच पर लान का काम करेंगी। वीणा ने 1-3 जुलाई 07 को लाहौर में आयोजित स्थानीय शासन व्यवस्था में भारत-पाकिस्तान वार्ता में भारत के 50 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल हुईं थीं। वहां गुड गवर्नेंस के लिए वीणा को पाकिस्तान के नेशनल रिकंस्ट्रक्सन ब्यूरो के चेयरमैन मि. डैनियल के हाथों पुरस्कृत किया गया । पिछले वर्ष अतंराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर दिल्ली में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित अनन्या कार्यक्रम में वीणा देवी को उसके साहसिक पहल के लिए यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सम्मानित करते हुए कहा था कि वीणा इज द बेस्ट मुखिया आफ इंडिया। लोक सभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने भी उन्हें सम्मानित किया था। वीणा 2004 में सरोजनी नायडू पुरस्कार से सम्मानित की गई ।ड्ढr वीणा की शादी पंचायत के सिकन्दरा गांव के 45 वर्षीय रामप्यारे प्रसाद के साथ हुई थी, लकिन दुर्भाग्य कि 16 वर्ष की आयु में वह विधवा हो गई। फिर भी उसने विचलित होन के बजाय संघर्षों को रास्ता चुना। लिहाजा, 2001 में जनता ने उनका साथ दिया और मुखिया के रूप में उसे चुना। जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरन के कारण 2006 को चुनाव में वे दोबारा निर्वाचित हुई। अनपढ़ होते हुए भी वह पंचायत के विकास के लिए प्रयासरत है। योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए डीएम से मुखातिब रहती हैं। औरंगाबाद : भ्रष्टाचार के दलदल में डूबा पंचायती राजड्ढr प्रेमेन्द्र कुमार मिशड्र्ढr औरंगाबाद । जिले के तमाम आला अधिकारी 1ाून को तब सकते में आ गए जब नवीनगर की केरका पंचायत की सैकड़ों महिलाएं स्थानीय मुखिया के खिलाफ इंदिरा आवास योजना में रिश्वत मांगने की शिकायत करते हुए समाहरणालय में घुस आई। ऐसी शिकायतें सिर्फ केरका से ही नहीं आ रहीं बल्कि पूरी पंचायती राज व्यवस्था ही भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी नजर आ रही है। चाहे मामला नरगा का हो या फिर पंचायत शिक्षकों की बहाली का। अब तक सिर्फ औरंगाबाद सदर अनुमंडल में ही पंचायत शिक्षकों की मुखियों द्वारा की गईं दो सौ बहालियां फर्ाी पाई गईं तथा इस मामले में आधा दर्जन मुखिया दोषी पाए गए जिन पर मुकदमें दर्ज कराए गए या अन्य कार्रवाई की गई। गर्मियों की शुरुआत के साथ ही चापाकल लगाने के लिए पंचायतों को राशि दी गई थी पर आज तक इन चापाकलों के लगने की सूचना विभाग को नहीं है। नरगा या ग्रामीण विकास मद की अधिकतर योजनाएं ऐसी ली जाती हैं जिनमें लूट खसोट की पर्याप्त गुंजाईश हो। जसे पईन-करहा उड़ाही, मिट्टी का काम, नाली का निर्माण आदि। बारिश की पहली बौछार ही ऐसी योजनाओं में भ्रष्टाचार के तमाम सबूत मिटा डालती हैं। नतीजन ग्रामीण सड़कें बनने के साथ ही टूटने भी लगती है। राष्ट्रीय स्वच्छता मीशन के तहत लाख प्रयास के बावजूद शौचालयों के निर्माण का काम मंथर गति से चल रहा है। नरगा में तो सभी को जाब कार्ड तक नहीं बांटे गए हैं। जन वितरण प्रणाली भी पंचायतों में बेमानी हो गई है। सहरसा : मुखियों के पतियों को ‘एमपी’ की उपाधि है प्राप्तड्ढr सहरसा (हि.टी.)। सहरसा जिले में मुखिया के काम करने के तरीके में खास बदलाव नहीं आया है। 153 पंचायतों में आरक्षण की कृपा पर मुखिया बनी अधिकांश महिलाएं चौखट से भी बाहर नहीं निकली हैं। उनकी जगह उनका पति अर्थात मुखिया पति (ािन्हें इस क्षेत्र में लोग ‘एम.पी.’ साहब कहते हैं) पंचायत चला रहे हैं। प्रखंड स्तर पर होने वाली बैठकों में महिला मुखिया की जगह मुखिया पति ही ठाठ से बैठते हैं। कई पंचायतों की महिला मुखिया राशि रहते खर्च नहीं कर पाती है। उनके पति को डर है कि कहीं उनके विरोधी जाल रचकर केस मुकदमा में न फंसा दे, जिससे पत्नी को जेल जाना पड़े। नौकरशाहों की बात करं तो अभी भी बीडीओ का खौफ मुखिया पर अधिक है। शिक्षक नियोजन से शिक्षा मित्र और न्याय मित्रों की नियुक्ित के नाम पर लक्ष्मी की हुई बरसात के बाद आर्थिक रूप से काफी सबल बन चुके मुखिया पर धन-बल की खास चमक दिखने लगी है। महिषी प्रखंड की 1पंचायतों में 8 मुखिया, 7 सरपंच एवं 13 पंचायत समिति सदस्य महिलाएं हैं। शुरू-शुरू में पति के साथ प्रखंड के बैठकों में आती-ााती थी। लेकिन अब खुद आने लगी हैं।ड्ढr पस्तवार पंचायत की दलित मुखिया शुरू में कुर्सी पर नहीं बैठती थी, लेकिन अब बैठकों में कुर्सी खींच कर बैठती ही नहीं बल्कि खूब बढ़-चढ़ कर पंचायतों की समस्या को रखती हैं। महिसरहो पंचायत के हरिान मुखिया किशोर पासवान ने नरगा योजना से जलस्रेत निकासी के तहत मखाना की खेती कर विकास का नया उदाहरण दिया है। बीडीओ राजेश कुमार सिंह कहते हैं कि पूर्व की परम्परा से वर्तमान में अपेक्षित सुधार आया है। सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड की कुल 24 पंचायतों में 12 महिला मुखिया हैं।

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