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पढ़े फारसी बेचे तेल, देखो रे नीयत का खेल

शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के बीच बढ़ रही विकास की खाई को पाटने के लिए भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईए) अहमदाबाद के छात्र कौशलेन्द्र ने करोड़ो रुपये की नौकरी छोड़ कर एक अनोखी शुरुआत की है और वह बिहार के सब्जी उत्पादक किसानों को राजधानी पटना से सीधे जोड़ने का प्रयास कर रहा है। कौशलेन्द्र की इस पहल से जहां एक आेर सब्जी उत्पादक बिचौलियों से मुक्त होकर सीधे राजधानी के बाजारों से जुड़ेंगे और उन्हें उनके उत्पाद की उचित कीमत मिलेगी, वहीं दूसरी आेर राजधानीवासियों को ताजी हरी सब्जियां आसानी से मिल सकेगी। इस अभियान के तहत कौशलेन्द्र ने एशिया के सबसे बड़े कॉलोनी कंकड़बाग में सब्जी का ठेला लगाकर सब्जी ब्रिकी का काम आरंभ भी कर दिया है। प्रथम दृष्टि में देखने में तो यह ठेला आम लगता है, लेकि न इसकी खासियत यह है कि यह ठेला पूरी तरह वातानुकूलित है, जिससे गर्मी के इस मौसम में भी अधिक समय तक सब्जियों में ताजगी बनी रहती है। कौशलेन्द्र का कहना है कि खाद्यान्न का उत्पादन करने वाले किसानों की माली हालत किसी से छिपी नहीं और पूरे साल मेहनत करने के बावजूद मुश्किल से तीनों वक्त अनाज मिल पाता है। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी पैदावार की उचित कीमत दिलाना समय की मांग है और इसके लिए उन्हें सीधे बाजार से जोड़ने की जरूरत है।

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