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आर्थिक विकास दर में कमी होगी : मूडी

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मुद्रास्फीति पर नकेल कसने के लिए उठाए गए कदम से देश की आर्थिक विकास दर कुंद होगी। वैश्विक आकलन एजेंसी मूडी ने यह दावा किया है। मूडी के मुताबिक एक साल पहले की नौ फीसदी आर्थिक विकास दर की तुलना में मौजूदा वित्त वर्ष में यह दर 7़ 6 फीसदी रहेगी। रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट और नकद आरक्षित अनुपात में बढ़ोतरी के फैसले से सख्त मौद्रिक व वित्तीय अनुशासन का माहौल पैदा होगा। इससे आर्थिक विकास दर में कमी आएगी। मूडी ने कहा है कि सख्त वित्तीय और मौद्रिक अनुशासन से मुद्रा प्रवाह पर असर पड़ेगा। रिजर्व बैंक के फैसले से संकेत मिलता है कि सरकार की सवर्ोच्च प्राथमिकता है मुद्रास्फीति को लगाम देना। बैंक अपनी मौद्रिक नीति को लेकर भविष्य में और सख्ती दिखाएगा। बैंेक मानता है कि यह मुद्रास्फीति एक तरह से आयातित है। भारत में बाह्य कारकों के कारण इसमें इजाफा हो रहा है। इसके आकलन में कहा गया है कि ऐसे में जब सख्त मौद्रिक अनुशासन के कारण घरेलू मांगों का दायरा सिमटना तय है, अर्थव्यवस्था को बाजार से मिल रहा सहारा पहले से सीमित हो जाएगा। मूडी का मानना है कि तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों में अप्रत्याशित उछाल से मुद्रास्फीति में 100 बेसिस प्लांइट और जुड़ गए हैं। इसका आकलन है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में थोक मूल्य सूचकांक में उछाल दोहरे अंक पर जा पहुंचेगी।

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