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ऋण महंगा कचचरने की वकालत

आसमान छूती महंगाई दर पर नियंत्रण को लेकर रिार्व की ओर से ब्याज दरें बढ़ाने से जहां एक ओर आवास और अन्य महंगे उपभोक्ता उत्पाद खरीदना कठिन हो गया है,वहीं कॉरपोरट जगत ने आर्थिक विकास दर पर प्रतिकूल असर पड़ने की भी गंभीर आशंका जाहिर की है। अलबत्ता, सरकार ने साफ किया है कि इस फैसले से आर्थिक विकास दर कतई प्रभावित नहीं होगी। रिार्व बैंक के इस कदम से घरलू आर्थिक दर प्रभावित होने की आशंकाओं को खारिा करते हुये वित्त मंत्रालय ने कहा है कि इससे आर्थिक परिदृश्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।ड्ढr सरकार की मंशा घरलू मांग के प्रबंधन के साथ ही आर्थिक विकास दर बढ़ाने की संभावनाओं को सुनिश्चित करना है। इस कदम से घरलू आर्थिक विकास दर बढ़ने के साथ ही घरलू व विदेशी निवेशकों का विश्वास और भी मजबूत होगा। मंत्रालय के मुताबिक घरलू मांग अभी भी काफी ऊंचे स्तर पर है। इसका प्रमाण यह है कि गैर-खाद्य उत्पादों पर बैंक ऋण अभी भी 26.2 फीसदी के स्तर पर बने हुये हैं। घरलू मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बना हुआ है और कृषि क्षेत्र के प्रदर्शन में बेहतरी के संकेत मिले हैं। रिार्व बैंक की ओर से रपो दर और नकद आरक्षित अनुपात सीआरआर में बढ़ोत्तरी के बाद पंजाब नेशनल बैंक सहित कई बैंकों ने ब्याज दरें बढ़ाने की बात कहीं है। लेकिन देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ने इस बार में औपचारिक घोषणा को चालू माह के अंत तक के लिए टाल दिया है। उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी के चलते रीयल एस्टेट क्षेत्र के साथ उपभोक्ता उत्पाद क्षेत्र का प्रभावित होना तय है। इसी मामले को लेकर देश के प्रमुख उद्योग चैंबरों फिक्की और एसोचैम ने भी भावी विकास दर कमजोर रहने की भारी आशंका जताई है। फिक्की के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हर्षपति सिंहानिया के मुताबिक रिार्व बैंक के इस फैसले से औद्योगिक विकास दर के साथ ही सकल घरलू उत्पाद जीडीपी की विकास दर पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की उम्मीद है।ड्ढr

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